दुर्गाकुंड वाली मां कूष्मांडा के दरबार में चौथी निशा हर किसी के लिए यादगार बन गई। भोजपुरी गायक व दिल्ली के सांसद मनोज तिवारी जब मंच पर पहुंचे तो मंदिर परिसर हर-हर महादेव के जयकारे से गूंज उठा। मनोज तिवारी ने जैसे ही मंच संभाला कोई माला चुनरी पहनाने को आतुर था तो कोई देवी गीतों की फरमाइश कर रहा था।
मनोज तिवारी ने दर्शकों का दोनों हाथ उठाकर अभिवादन किया और कहा कि दो साल हम नाही आ पवलीं कोरोना से माई सबके बचा लिहलीं। इसके बाद उन्होंने देवी गीतों की झड़ी लगा दी। मनोज ने दुर्गा मैय्या के सिंगार भक्तन क हियरवा खो गइले, जब माई के होई नजर त किस्मत संवर जाई, काला टीका-काला टीका लगाओ रे..., सुख और दुख पहाड़ वाली मैया पर छोड़ दिहली...की प्रस्तुतियों से पूर माहौल में भक्तिरस का संचार किया।
मनोज ने कहा कि मैं कहीं भी रहूं पर दुर्गा मंदिर, शीतला मंदिर में हमेशा आता रहा हूं। बस माई अइसे ही हमेशा बुलावत रहिए, अपने मनोजवा के गवावत रहिए...सुनाया तो हर किसी ने उनके साथ अपने सुर मिलाए। इसके पूर्व चौथी निशा की शुरुआत मां दुर्गा के भव्य शृंगार, भजन, आरती, गायन, वादन व नृत्य के साथ हुई।
मां दुर्गा का शृंगार महंत पं. कौशल पति दुबे व आरती पं. संजीव दुबे ने किया। शुभारंभ मयंक मिश्रा के देवी स्तुति से हुआ। श्रेया भट्टाचार्य ने कथक नृत्य प्रस्तुत किया। तबले पर विनय मुखर्जी, बाब भट्टाचार्य गायन, हारमोनियम मोहित साहनी, बांसुरी पर विनीत शर्मा व सितार पर रॉनित चटर्जी ने साथ दिया।
सुरेंद्र सुगम ने नाही बाटे नारियल चुनरी, चंदन सिंह मधुर ने हर साल आई मैया तोहरे दरबार.., गोविंद गोपाल ने गेहूं के बलिया सुगना जुठरलस...व मेरी मैया ने खोला है खजाना... सुनाकर सभी को भावविभोर कर दिया। बलिया के गोपाल राय ने पूर्वी छपरहिया में देवी गीत प्रस्तुत किया। ज्योति माही, आराधना सिंह, कल्पना पांडेय, आराधना सिंह, कुसुम पांडेय, आकाश मिश्रा सहित अनेक कलाकारों ने रात्रि पर्यंत मां के दरबार में अपनी हाजिरी लगाई। संयोजन व संचालन कर रहे गीतकार कन्हैया दुबे केडी ने मनोज तिवारी को मोती की माला और अंगवस्त्रम देकर अभिनंदन किया। स्वागत महंत पं. कृष्णा प्रसाद दुबे, पं. रामनरेश दुबे, पं. दीपू दुबे, पं. धनी गुरु पं. ऋ षभ दुबे, पं. डब्बू महाराज ने किया। तबले पर बलराम मिश्रा, सुधांशु, ढोलक पर मोती, नसीम, सनी, पैड पर वीरेंद्र, विवेक, बैंजो पर शंकर और ऑर्गन पर संतोष ने संगत किया।