भोजपुरी की साहित्य परंपरा को बरकरार रखने तथा इसे बढ़ावा देने के उद्देश्य से भोजपुरी लोकसंस्कृति का एक खास आयोजन नई दिल्ली में शनिवार को होने जा रहा है। सावन का मनभावन और पावन महीना लोकराग और लोकगीतों का होता है।
इसी विषय को मूल रूप से ध्यान और केंद्र में रखकर 15 जुलाई शनिवार को दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज के सभागार में भोजपुरी लोकसंस्कृति का आयोजन लोकरसधार नाम से होगा।
यह आयोजन 'भोजपुरी लोकगीतों की स्त्रियां और भोजपुरी लोकगीतों में स्त्रियां' विषय पर केंद्रीत होगा। आयोजन दोपहर दो बजे से पांच बजे तक होगा। दुनिया भर में फैले भोजपुरियों का समूह आखर, बलिया की संस्था पहल, लोकराग-पुरबियातान और हंसराज कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में हो रहे इस आयोजन में दो युवा लोकगायक कलाकारों का गायन होगा।
कार्यक्रम की जानकारी देते हुए शैलेंद्र मिश्र ने बताया कि यह कार्यक्रम सांस्कृतिक साहित्यिक है, जिसका मुख्य उद्देश्य भोजपुरी की साहित्यिक परंपरा को आगे बढ़ाने है। बलिया से भी 20 से अधिक साहित्यकार एवं कवि शामिल होंगे।
इस आयोजन के जरिये गायन के संग यह बताने की कोशिश करेंगे कि भोजपुरी लोकगीतों को लेकर लोगों में जो अश्लील और विद्रूपता की भावना बनी है वह भोजपुरी नहीं है। भोजपुरी के नाम पर अश्लीलता कुछ कुत्सित मानसिकता वाले लोगों के खुराफाती मगज की उपज है।
भोजपुरी गीतों के बड़े रचनाकारों जैसे भिखारी ठाकुर, महेंदर मिसिर और अन्य द्वारा रचित गीत, सभी में स्त्रियां ही केंद्र में रही हैं लेकिन हमेशा से ही स्त्री का मन केंद्र में रहा है, तन नहीं।
लोकरसधार के इस आयोजन में सुश्री चंदन तिवारी और शैलेंद्र मिश्र द्वारा पारंपरिक गीतों के संग ही सावन के विशेष गीत यथा कजरी, ठुमरी, शिव गीत, राधाकृष्ण गीत, पचरा आदि की खास प्रस्तुति होगी। लोकरसधार कार्यक्रम के लिए सोशल मीडिया पर कैंपेन भी चलाया जा रहा है।