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ट्रेड यूनियन की भारत बंद हड़ताल, सड़कों पर उतरे मजदूर, वाराणसी में 400 करोड़ का लेन-देन प्रभावित

Wed, 08 Jan 2020 10:57 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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चाँदपुर से मजदूर संघ की ओर से निकला जुलूस। - फोटो : अमर उजाला।
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ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर हड़ताल की वजह से बुधवार को करोड़ों का कारोबार प्रभावित रहा। बैंकों में जमा-निकासी और चेकों का क्लीयरेंस नहीं हो सका। डाकघर, दूरसंचार और बीमा कार्यालयों पर भी सन्नाटा छाया रहा। इस वजह से जिले में ही करीब 500 करोड़ का कारोबार प्रभावित रहा। इसमें बैंकों का 400 करोड़ का कारोबार नहीं हुआ।

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यूपी बैंक इंप्लाइज यूनियन की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, जिले में 17 हजार चेकों का भुगतान भी नहीं हो सका। कर्मचारी नेताओं ने जल्द ही मांगें न माने जाने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है।

न्यूनतम वेतनमान 21 हजार करने, पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू करने, बैंकों का विलय न करने, रिक्त पदों पर नियुक्तियां सहित कई मांगों को लेकर हड़ताल का सबसे अधिक असर औद्योगिक इकाइयों पर दिखा। डाकघरों, बीमा कार्यालय, दूरसंचार कार्यालयों के कर्मचारियों ने कामकाज ठप कर प्रदर्शन किया। औद्योगिक इकाइयों के मजदूरों ने भी जुलूस निकाला और सरकार के विरोध में नारे लगाए।

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उधर आल इंडिया बैंक इंप्लाइज एसोसिएशन और बैंक इंप्लाइज फेडरेशन आफ इंडिया के आह्वान पर बैंक आफ बड़ौदा, केनरा बैंक, सिंडिकेट बैंक, यूनियन बैंक, सेंट्रल बैंक, पंजाब नेशनल बैंक आदि बैंकों की अधिकांश शाखाओं में ताले बंद रहे। कर्मचारियों ने कामकाज ठप कर धरना दिया।

इस वजह से जमा-निकासी के लिए आने वालों को निराश लौटना पड़ा। यूपी बैंक इंप्लाइज यूनियन के मंत्री संजय कुमार शर्मा ने बताया कि वाराणसी के 400 करोड़ के साथ ही पूर्वांचल (गाजीपुर, भदोही, मिर्जापुर, चंदौली, जौनपुर, आजमगढ़) में हड़ताल की वजह से 800 करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ। इस दौरान आरबी चौबे, कुं दन, कृष्णकांत उपाध्याय, पीके घोष, जेके दास, प्रमोद द्विवेदी आदि मौजूद रहे।

इंडस्ट्रियल इस्टेट में निकला जुलूस

चांदपुर इंडस्ट्रियल स्टेट और रामनगर इंडस्ट्रियल स्टेट में मजदूर यूनियनों के आह्वान पर अलग-अलग कारखानों में काम करने वाले मजदूरों ने जुलूस निकाला। हाथों में झंडा लिए मजदूरों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इसमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल रही। यूनियन के नेता पहले चांदपुर औद्योगिक आस्थान के पास एकत्र हुए। इसके बाद जुलूस निकाला। उनका कहना था कि आठ घंटे कामकाज की व्यवस्था लागू करने और न्यूनतम वेतन 21 हजार रुपये देने की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
 
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दवा प्रतिनिधियों ने भी नहीं किया काम

हड़ताल के समर्थन में दवा प्रतिनिधियों ने भी कामकाज ठप रखकर जुलूस निकाला। यूपी उत्तराखंड मेडिकल एंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव एसोसिएशन के अध्यक्ष आलोक मिश्रा और प्रदेश सह सचिव मनोज शर्मा के निर्देशन में निकले जुलूस के माध्यम से सेल्स प्रमोशन इंप्लाइज एक्ट लागू करने की मांग की गई। इसके अलावा आठ घंटे तक ही काम लिए जाने, दवाओं और उपकरणों पर जीएसटी हटाने, शोषण बंद करने आदि की मांग की गई।

हड़ताल के समर्थन में सड़क पर उतरे डीरेका कर्मी

केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर देशव्यापी हड़ताल के समर्थन में डीरेका कर्मचारी भी सड़क पर उतरे। डीरेका बचाओ संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले बारिश के बावजूद कर्मचारी कारखाने के पूर्वी गेट पर इकट्ठा हुए। उन्होंने रेलवे एवं रेलवे उत्पादन इकाइयों, वर्कशॉप, ट्रेनों, स्टेशनों, प्रमुख रेल मार्गों के निजीकरण/निगमीकरण के खिलाफ प्रदर्शन किया।

सभा को संबोधित करते हुए संयोजक वीडी दुबे ने कहा कि सरकार श्रम कानूनों के सुधार के नाम पर 44 श्रम कानूनों को समाप्त कर 4 कोड में बदल रही है। इसके चलते कर्मचारियों को मिलने वाले तमाम अधिकार छीन लिए जाएंगे। इस दौरान डीएलडब्ल्यू रेल मजदूर यूनियन के महामंत्री राजेंद्र पाल, कर्मचारी परिषद सदस्य प्रदीप यादव, नवीन सिन्हा, देवता नंद तिवारी, अमित कुमार, अरविंद श्रीवास्तव, श्याम मोहन आदि मौजूद रहे।




 
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