घटनास्थल से 40 किमी दूर तक लगे सीसी कैमरों को खंगाला गया। इन सभी के फुटेज से चिह्नित बदमाशों की तलाश शुरू की गई। गुरुवार की रात मुखबिर की सूचना पर एसओ चौबेपुर, क्राइम ब्रांच प्रभारी, जाल्हूपुर चौकी इंचार्ज त्रिवेणी सिंह, एसआई प्रदीप यादव, चिरईगांव चौकी इंचार्ज रवि प्रकाश यादव और पुनदेव सिंह की टीम ने बलुआ पुल के समीप से पुनीत और बाबूलाल को गिरफ्तार किया।
दोनों ने बताया कि राकेश की हत्या के बाद से ही गंगा के कछार में छुपे थे। जब भगवान और अमन उन्हें लेने नहीं आए तो वह पैदल ही चंदौली की ओर जा रहे थे। एसपी ग्रामीण ने बताया कि जल्द ही भगवान और अमन भी पुलिस की गिरफ्त में होंगे।
क्या थी वजह, क्या हुआ था 29 जून की शाम
पुनीत और बाबूलाल ने पूछताछ में बताया कि भगवान के छोटे भाई लक्ष्मण ने इस साल लगभग 12 लाख रुपये की जमीन बेची थी। राकेश और लक्ष्मण में अच्छी बनती थी। राकेश की संगत में आकर लक्ष्मण शराब, गांजा और स्मैक के नशे में खूब पैसा उड़ाता था। दोनों अविवाहित भी थे।
बीते मई महीने में सड़क हादसे में लक्ष्मण की मौत हो गई। भगवान को लगता था कि राकेश उसके भाई लक्ष्मण का पैसा भी हड़प लिया है। साथ ही राकेश की संगत में आने की वजह से ही लक्ष्मण की मौत हुई है। इसके बाद राकेश की हत्या कराने का भगवान ने निर्णय ले लिया।
भगवान ने अमन, पुनीत और बाबूलाल को बुलाकर राकेश की हत्या की योजना बनाई और सभी को 10-10 हजार रुपये देने को कहा। वारदात की शाम भगवान अपनी बाइक पर राकेश को बैठाकर लाया था। एक बाइक पर बाबूलाल और शूटर अमन थे और सबसे पीछे की बाइक में पुनीत अकेला था। कमौली में नहर पुलिया पर रुकने के बाद राकेश की कनपटी पर अमन ने गोली मारी थी। इसके बाद सभी भाग निकले थे।