ट्रेन के एसी कोच से चादर और तौलिया चुराने पर जुर्माने का प्रावधान होने के बाद भी यात्री बाज नहीं आ रहे हैं। एक महीने में 100 से 120 चादर और तौलिये चोरी हो रहे हैं। कोच अटेंडेंट की ओर से रेल यात्रियों को दिए जाने वाले 1500 से अधिक तौलिये पिछले साल चोरी हुए। पूर्वोत्तर रेलवे वाराणसी मंडल से गुजरने वाली लगभग 38 ट्रेनों में सबसे ज्यादा चोरी शिवगंगा, बनारस सुपरफास्ट, काशी विश्वनाथ जैसी ट्रेनों में हुई है।
रेल अधिकारियों के अनुसार, सबसे ज्यादा चोरी तौलिये की होती है। कोरोना से पहले यह आंकड़ा हजार में हुआ करता था। सभी ट्रेनों के कोच अटेंडेंट को सलाह दी गई है कि यात्रा खत्म होने से आधे घंटे पहले ही बेडरोल इकट्ठा कर लें, ताकि चोरी न हो सके।
चोरी को देख तौलिया देने में परहेज
शिवगंगा एक्सप्रेस के एक कोच अटेंडेंट ने बताया कि थर्ड एसी कोच में सबसे ज्यादा चोरी होती है। तौलिया बहुत कम ही यात्रियों को दिया जाता है। जो मांगते हैं उन्हें यह सुविधा दी जाती है। हालांकि, यह भी ध्यान रखा जाता है कि किसी भी यात्री को सफर में परेशानी नहीं हो।
तीन टन क्षमता की हो गई मैकेनाइज्ड लॉन्ड्री
बेडरोल की धुलाई के लिए मैकेनाइज्ड लॉन्ड्री की क्षमता भी बनारस में बढ़ा दी गई है। पहले यह दो टन का हुआ करता था अब तीन टन क्षमता हो गई है। ताकि यात्रियों को समय से पहले साफ-सुथरा बेडरोल दिया जा सके। यात्रियों की शिकायत के आधार पर ब्लैंकेट के कवर पर चेन भी लगाई गई है। पिछले दिनों इस लॉन्ड्री को आईएसओ सर्टिफिकेट भी मिला।