जालसाज इन वीडियो को सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर अपलोड करने की धमकी देते हैं और वीडियो डिलीट करने के एवज में ब्लैकमेल कर बिटक्वाइन अकाउंट में राशि जमा कराने के लिए दबाव बनाते हैं। जिला साइबर क्राइम टीम के कोऑर्डिनेटर विजय श्रीवास्तव ने बताया कि फिशिंग लिंक के जरिए निजी डेटा चोरी करने के साथ ही बैंक खाते में भी सेंधमारी की जाती है। फिशिंग लिंक के जरिए आईपी एड्रेस जालसाजों तक पहुंच जाता है।
इसके बाद आईपी ट्रैकर के जरिए जालसाज मौजूदा लोकेशन हासिल कर लेते हैं। लिंक पर क्लिक करते ही मोबाइल फोन में मॉलवेयर इंस्टाल हो सकता है, जिसके जरिए जालसाज आपके खाते को एक्सेस कर सकते हैं। फिशिंग लिंक को क्लिक करने से ऐनीडेस्क, टीमव्यूअर जैसे रिमोट/स्क्रीन शेयरिंग ऐप के जरिए भी जालसाज आपके फोन पर पूर्ण नियंत्रण हासिल कर सकते हैं।