ठगी में दुर्गाकुंड कबीर नगर के रहने वाले इकबाल खान के आईसीआईसीआई खाते का उपयोग मुख्य तौर पर किया गया। ऐसी चेन बनाई कि इकबाल के खाते में पैसा आते ही ऑटोमेटिक रूप से अन्य 50 से ज्यादा खातों में पैसा ट्रांसफर होता गया। 98 लाख की ठगी में 1000 से अधिक बैंक खातों का उपयोग हुआ। साइबर पुलिस ऐसे 50 से ज्यादा खाताधारकों को ट्रेस कर चुकी है। साइबर क्राइम थाने की पुलिस के अनुसार विदेश में बैठे मुख्य सरगना तक पहुंचना कठिन है, क्योंकि कि वह वर्चुअल नंबर ही उपयोग करता है।
बैंक खातों की सर्विलांस से निगरानी, मोबाइल सीडीआर भी खंगाला
एसीपी ने बताया कि साइबर क्राइम थाना प्रभारी निरीक्षक विजय नारायण मिश्र मुकदमे के विवेचक के तौर पर आरोपियों के बैंक खातों की सर्विलांस के जरिये निगरानी कर रहे थे। चार दिसंबर को मुकदमा दर्ज होने के बाद विभिन्न जनपदों के बैंक और मोबाइल सीडीआर को खंगालते हुए आरोपियों तक पहुंचा गया।
बलिया के फेफना मरगूपुर के मूल निवासी अनुज कुमार यादव वर्तमान में सारनाथ के आशापुर स्थित माधव नगर कॉलोनी में रहते हैं। 31 जुलाई को नेवी से रिटायर हुए थे। साइबर जालसाजों ने ट्राई का अधिकारी बनकर 11 नवंबर से तीन दिसंबर तक उन्हें डिजिटल अरेस्ट किया। रिटायर सैन्यकर्मी को नरेश गोयल मनी लॉन्डि्रंग केस में फंसाने की धमकी दी और 98 लाख रुपये विभिन्न बैंकों में ट्रांसफर करवा लिए थे। चार दिसंबर को बेटा घर पहुंचा, तब जाकर अनुज ने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। गिरफ्तारी टीम में निरीक्षक विजय नारायण मिश्र, निरीक्षक राजकिशोर पांडेय, निरीक्षक विपिन कुमार, निरीक्षक विजय कुमार यादव, एसआई संजीव कन्नौजिया, सतीश सिंह, शैलेंद्र कुमार, आलोक रंजन सिंह, श्याम लाल गुप्ता, गोपाल चौहान, चंद्रशेखर यादव आदि रहे।
साइबर विशेषज्ञ श्याम लाल गुप्ता ने बताया कि गिरोह के आरोपियों की ओर से लोगों के मोबाइल नंबर पर ट्राई और सीबीआई अधिकारी बनकर वर्चुअल नंबर से कॉल किया जाता था। जालसाज कहते थे कि आपके नाम से जो सिमकार्ड जारी हुआ है और वह नंबर अवैध गतिविधियां में लिप्त है। इस तरह का झांसा देकर उन्हें वह डिजिटल अरेस्ट करके सत्यापन के नाम पर कथित आरबीआई के बैंक खाते में पैसा ट्रांसफर कराते हैं। फर्जी गेमिंग एप के माध्यम से उन पैसों को उपभोक्ताओं को पे-आउट के नाम पर ट्रांसफर कर दिया जाता है। इस तकनीक में साइबर अपराधी ईसीएस व ईआईपी सर्विसेज का उपयोग करते हैं। ओटीपी प्राप्त करने के लिए एसएमएस फारवर्डर एप्लीकेशन जैसे ड्रैगन एमएसएस का उपयोग किया जाता है। अपनी पहचान छिपाने के उद्देश्य से इस तरह की घटना में फर्जी म्यूल बैंक खातों, फर्जी सिम कार्ड व डिजिटल फुटप्रिंट से बचने के लिए वर्चुअल मशीन का प्रयोग किया जाता है।