उतर प्रदेश बार काउंसिल के पूर्व चेयरमैन हरिशंकर सिंह ने रविवार को कहा कि यूपी बार काउंसिल चेयरमैन के अधिकार सीज करने संबंधी बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) का आदेश गलत है। उन्होंने कहा कि बीसीआई का आदेश राजनीति से प्रेरित है। बिना नोटिस दिए रात को यह आदेश जारी किया गया, यह पूरी तरह से गलत है।
ऐसा आदेश जारी करने का अधिकार बीसीआई के चेयरमैन को नहीं है। वह इस आदेश को हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे और निरस्त कराएंगे। हरिशंकर सिंह ने कहा कि कोरोना वायरस जैसी महामारी के समय में जरूरतमंद अधिवक्ताओं के लिए एक करोड़ रुपये देने की बात बीसीआई ने की थी। यह पैसा बार-बार मांगने पर भी नहीं दिया गया।
निलंबित सचिव डॉ. रामजीत सिंह यादव की बहाली के मामले पर उन्होंने कहा कि वह तीन साल से निलंबित थे। छह माह में सेवा समाप्ति या बहाली के मुद्दे पर निर्णय हो जाना चाहिए था। 14 मई को आवेदन देकर रामजीत ने न्याय की गुहार लगाई थी।
उनकी पत्रावली देखी गई, उनके खिलाफ कोई अनियमितता नहीं मिली। आरोप सिद्ध नहीं पाया गया तो उन्हें बहाल कर दिया गया। बीसीआई के चेयरमैन मनन मिश्रा ने बीते शुक्रवार की रात यूपी बार काउंसिल के चेयरमैन हरिशंकर सिंह के अधिकार सीज कर दिए थे और चेयरमैन पद के कार्य करने पर रोक लगा दी थी।