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Varanasi News: ऐसा शहर बनारस है, जो नीरसता में भी सारे रस भर देता है...

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सुबह ए बनारस आनंद कानन की घाट संध्या के काव्यार्चन प्रकल्प का के 54वें सत्र में काव्य गंगा प्रवाहित हुई। मंगलवार को अस्सी घाट पर गोवा आयोजन की अध्यक्षता पद्मश्री के लिए चुनी गईं भारत की पहली एसिड अटैक सरवाइवर डॉ. मंगला कपूर ने की। नगर के वरिष्ठ एवं नवोदित रचनाकारों ने अपनी साहित्यिक जिजीविषा का परिचय दिया। इसमें डॉ. निकेता सिंह संकल्प ने ख़ुशियों को दुगना कर देता है, गम को सबके कम कर देता है, ऐसा एक शहर बनारस है, जो नीरसता में भी सारे रस भर देता है... गाकर सभी को मुग्ध कर दिया।
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डॉ. मंगला कपूर ने सुनाया- दोस्त बन बन के दगा करते हैं, एक हम हैं जो वफा करते हैं, पर वफा का सिला जफा क्यूं है, आदमी आदमी से खफा क्यूं है...। जग्दीश्वरी चौबे के संचालन में रचनाकारों ने काव्य पाठ किया। प्रो. वत्सला श्रीवास्तव ने माहिया छंद सुनाए। बानगी कुछ यूं रही-शिव काशी में बसते, दर्शन को आते, जो भक्त जहां रहते...। बालकृष्णदास गुजराती ने सुनाया- शब्द शब्द में बह रही काव्य गंग की धार, हृदयस्पर्शी मनोभावों को देती यहां आकर..., वरिष्ठ रचनाकार डाॅ. महेंद्र तिवारी अलंकार ने गंगा मां का आंचल मेरे हाथों से छूटा जाए...सुनाया। स्वागत संस्था के संस्थापक सचिव डॉ. रत्नेश वर्मा ने किया। इस मौके पर डाॅ. ओम प्रकाश श्रीवास्तव प्रकाश मिर्जापुरी, डाॅ.प्रताप शंकर दूबे, गिरीश पांडेय काशिकेय, ऋतु दीक्षित, प्रियंका सिंह माैजूद रहे।
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