बनारस इंटरनेशनल म्यूजिक फेस्टिवल
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बनारस क्लासिकल ऑरकेस्ट्रा की भी प्रस्तुति हुई। इसमें बनारस के 16 उदयीमान कलाकारों ने प्रस्तुतियां दी। समूह ने सबसे पहले राग बसंत में सरस्वती वंदना प्रस्तुती की। उसके बाद राग शंकरा में ''शंकर महादेव देवा'', राग मालकौंस में ''कोयलिया बोले अमवा की डार पर'', राग भैरवी में दादरा प्रस्तुत किया। समूह में सितार पर कृष्णा मिश्रा, बांसुरी पर भारद्वाज एस प्रसाद, हारमोनियम पर आनंद किशोर मिश्रा, तबले पर नवनीत प्रजापति, पखावज पर शुभम गुजराती रहे। गायन में आदित्य, दिव्यांशु, श्रद्धा, रचित आदि शामिल रहे।
काशी के कण-कण में संगीत : संजय
फेस्टिवल का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रो. वशिष्ठ त्रिपाठी और अभिनेता संजय मिश्रा ने किया। संजय मिश्रा ने कहा कि काशी के कण-कण में संगीत है, यह फनकारों की धरा है यह उत्सव ऐतिहासिक महत्व का उत्सव साबित होगा। अध्यक्षता करते हुए पं. शिवनाथ मिश्रा ने कहा कि संगीत भाषा की सीमाओं को तोड़ती है, हमें भले ही एकदूसरे की भाषा नहीं समझ आए, लेकिन संगीत जरूर समझ आता है। विशिष्ट अतिथि डॉ. राजेश्वर आचार्य ने कहा कि संगीत शुभता का प्रतीक है। इस दौरान प्रो. ऋतिक सान्याल, आर्यमा सान्याल ने विचार व्यक्त किए। इस दौरान प्रो. ज्योति रोहिल्ला राणा, रागिनी मिश्रा, पंडित देवब्रत मिश्रा आदि मौजूद रहे।
लगी दिग्गज कलाकारों की फोटो प्रदर्शनी
महोत्सव में काशी के संगीत घरानों के दिग्गज कलाकारों को फोटो प्रदर्शनी के जरिये याद किया गया। आयोजन स्थल पर उस्ताद बिस्मिल्लाह खां, पंडित किशन महाराज, पं. रविशंकर, गिरिजा देवी, सितारा देवी, राजन-साजन मिश्रा, सामता प्रसाद मिश्र, गोपी कृष्णा, पं. शारदा सहाय, पं. अमरनाथ पशुपति नाथ मिश्रा आदि की तस्वीरें लगाई गई थीं।