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बनारस में पहली बार: काशी से जुड़ा सात समंदर पार संगीत का नया तार, सितार व सैक्सोफोन पर गूंजा सजी कचौड़ी..

Sun, 05 Nov 2023 05:45 PM IST
किरन रौतेला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

शनिवार की शाम सितार वादक पं. रविशंकर की पूरब और पश्चिम के संगीत को जोड़ने वाली परिकल्पना ने महामना की बगिया में मूर्त रूप लिया। बीएचयू का केएन उडुप्पा सभागार में पं. शिवनाथ मिश्रा म्यूजिक फाउंडेशन की ओर आयोजित पहले बनारस इंटरनेशनल म्यूजिक फेस्टिवल की सबसे खास प्रस्तुति ट्रियो बनारस की रही।
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बनारस इंटरनेशनल म्यूजिक फेस्टिवल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मिर्जापुर कईला गुलजार हो कचौड़ी गली सून कईला बलमू...की धुन ने काशी से सात समंदर पार संगीत का नया तार जोड़ दिया। सितार, तबला और सैक्सोफोन की जुगलबंदी ने बनारसी कजरी में ऐसा जादू जगाया कि हर धुन बस रूह में उतर रही थी। इसके साथ ही पहला बनारस इंटरनेशनल म्यूजिक फेस्टिवल भी इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। 

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शनिवार की शाम सितार वादक पं. रविशंकर की पूरब और पश्चिम के संगीत को जोड़ने वाली परिकल्पना ने महामना की बगिया में मूर्त रूप लिया। बीएचयू का केएन उडुप्पा सभागार में पं. शिवनाथ मिश्रा म्यूजिक फाउंडेशन की ओर आयोजित पहले बनारस इंटरनेशनल म्यूजिक फेस्टिवल की सबसे खास प्रस्तुति ट्रियो बनारस की रही। सितार वादक पंडित देवब्रत मिश्रा के साथ जर्मनी के सैक्सोफोन वादक रोजर हेंसल और तबला वादक पंडित प्रशांत मिश्रा की त्रिगुणबंदी रही। उन्होंने सबसे पहले राग विलासखानी तोड़ी, झप ताल में चार्लीज की प्रस्तुति दी। उसके बाद 16 मात्रा की ताल में सवारी सफारी, राग भैरवी में नौ मात्रा की ताल में एक्ट्रीम बियोसे की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं।
बनारसी श्रोताओं को नया अनुभव दे गया स्विस संगीत

दूसरी प्रस्तुति स्विट्जरलैंड से आए कलाकारों के समूह गायन की रही। काशी में पहली बार स्विस संगीत बनारस के श्रोताओं के लिए भी नया अनुभव रहा। स्विट्जरलैंड से आए संगीत निर्देशक क्लॉडियो डेनुजर के साथ नौ सदस्यीय दल ने सबसे पहले पारंपरिक स्विस कोरस गीत प्रस्तुत किया। उसके बाद यूरोपियन संगीत संस्कृति के इतिहास पर आधारित गीत प्रस्तुत किया। अंत में उन्होंने यूरोप और स्विट्जरलैंड के प्रसिद्ध गीतों को लयबद्ध किया। समूह में फ्लूरिना डेनुजर, मनुएला मेयरहोफर, सुजैन, थॉमस लेंस, बर्नहार्ड ग्रेफ सहित अन्य शामिल रहे।
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16 उदीयमान कलाकारों ने दी प्रस्तुतियां

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बनारस इंटरनेशनल म्यूजिक फेस्टिवल - फोटो : अमर उजाला

बनारस क्लासिकल ऑरकेस्ट्रा की भी प्रस्तुति हुई। इसमें बनारस के 16 उदयीमान कलाकारों ने प्रस्तुतियां दी। समूह ने सबसे पहले राग बसंत में सरस्वती वंदना प्रस्तुती की। उसके बाद राग शंकरा में ''शंकर महादेव देवा'', राग मालकौंस में ''कोयलिया बोले अमवा की डार पर'', राग भैरवी में दादरा प्रस्तुत किया। समूह में सितार पर कृष्णा मिश्रा, बांसुरी पर भारद्वाज एस प्रसाद, हारमोनियम पर आनंद किशोर मिश्रा, तबले पर नवनीत प्रजापति, पखावज पर शुभम गुजराती रहे। गायन में आदित्य, दिव्यांशु, श्रद्धा, रचित आदि शामिल रहे।
काशी के कण-कण में संगीत : संजय

फेस्टिवल का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रो. वशिष्ठ त्रिपाठी और अभिनेता संजय मिश्रा ने किया। संजय मिश्रा ने कहा कि काशी के कण-कण में संगीत है, यह फनकारों की धरा है यह उत्सव ऐतिहासिक महत्व का उत्सव साबित होगा। अध्यक्षता करते हुए पं. शिवनाथ मिश्रा ने कहा कि संगीत भाषा की सीमाओं को तोड़ती है, हमें भले ही एकदूसरे की भाषा नहीं समझ आए, लेकिन संगीत जरूर समझ आता है। विशिष्ट अतिथि डॉ. राजेश्वर आचार्य ने कहा कि संगीत शुभता का प्रतीक है। इस दौरान प्रो. ऋतिक सान्याल, आर्यमा सान्याल ने विचार व्यक्त किए। इस दौरान प्रो. ज्योति रोहिल्ला राणा, रागिनी मिश्रा, पंडित देवब्रत मिश्रा आदि मौजूद रहे।
लगी दिग्गज कलाकारों की फोटो प्रदर्शनी

महोत्सव में काशी के संगीत घरानों के दिग्गज कलाकारों को फोटो प्रदर्शनी के जरिये याद किया गया। आयोजन स्थल पर उस्ताद बिस्मिल्लाह खां, पंडित किशन महाराज, पं. रविशंकर, गिरिजा देवी, सितारा देवी, राजन-साजन मिश्रा, सामता प्रसाद मिश्र, गोपी कृष्णा, पं. शारदा सहाय, पं. अमरनाथ पशुपति नाथ मिश्रा आदि की तस्वीरें लगाई गई थीं।
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