जगत नारायन दुबे ने जुलूस का नेतृत्व किया। फेकू, श्रीधर और रामभरोस शहीद हुए। इसके अलावा बाबतपुर में विश्वनाथ सिंह, पहाड़ा रेलवे स्टेशन फूंकने में झुलसे। बीएचयू के छात्र नरेश सिन्हा, कैलहट स्टेशन फूंकने में और पंजाब के छात्र कश्मीरा सिंह गिरफ्तार हुए। उन्हें बीएचयू की अस्थायी जेल में रखा गया, जहां कश्मीरा की मौत हो गई थी।
जिला कांग्रेस जांच समिति के अनुसार, पुलिस उत्पीड़न एवं यातना के चलते रामगति, सिद्धराज व गिरधारी ने जान गंवाई। 1942 के आंदोलन में बनारस जिले में 20 लोग शहीद हुए। दशाश्वमेध गोलीकांड में काशी उसी दिन शहीद हो गए। तीन शहादतें 14 अगस्त को हुईं। उन शहीदों की याद में 14 अगस्त को मशाल जुलूस निकालने की परंपरा कांग्रेस कमेटी ने शुरू की।