फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पर्चा लीक मामला : यूपी के अफसरों की कारगुजारी, सरकारी निर्देश भी नहीं मानते बलिया के डीएम और एसपी

Mon, 04 Apr 2022 04:28 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी 

सार

बोर्ड परीक्षाएं शुरू होने से पहले 22 मार्च को जारी सरकारी विज्ञप्ति के मुताबिक, प्रश्नपत्र लीक होने की सूचना अधिकारियों को देने पर संबंधित व्यक्ति को दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण मिलेगा, लेकिन 29-30 मार्च को जिला विद्यालय निरीक्षक व डीएम को संस्कृत व अंग्रेजी के वायरल पर्चे भेजने पर पत्रकारों को ही गिरफ्तार कर लिया गया।
विज्ञापन
demo pic... - फोटो : Amar Ujala Graphics
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बलिया के डीएम इंद्रविक्रम सिंह और एसपी राजकरन नय्यर सरकारी आदेश को भी नहीं मानते। पर्चा लीक प्रकरण में उनके कारनामे इस तथ्य को जाहिर कर रहे हैं। बोर्ड परीक्षाएं शुरू होने से पहले 22 मार्च को जारी सरकारी विज्ञप्ति के मुुताबिक, प्रश्नपत्र लीक होने की सूचना अधिकारियों को देने पर संबंधित व्यक्ति को दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण मिलेगा, लेकिन 29-30 मार्च को जिला विद्यालय निरीक्षक व जिलाधिकारी को संस्कृत व अंग्रेजी के वायरल पर्चे भेजने पर पत्रकारों को ही गिरफ्तार कर लिया गया।

विज्ञापन


माध्यमिक शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव की ओर से जारी सूचना के मुताबिक, परीक्षा खत्म होने से पहले प्रश्नपत्र या हल कॉपी को किसी माध्यम से प्रसारित करना उप्र सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम-1998 की धारा-4/10 के तहत दंडनीय अपराध है। लेकिन, ऐसे कृत्य की सूचना जनहित में अपर मुख्य सचिव, डीएम-एसपी, जिला विद्यालय निरीक्षक समेत अन्य अफसरों को देने पर यह धारा लागू नहीं होगी।

पत्रकार अजीत ओझा ने जनहित में ही जिला विद्यालय निरीक्षक व डीएम को वायरल पेपर भेजे थे। पत्रकार का मकसद छात्रहित में नकल व नकल माफिया पर अंकुश लगवाना ही था। फिर भी, सरकारी आदेश को दरकिनार करते हुए पत्रकार अजीत ओझा समेत दो अन्य पत्रकारों को गिरफ्तार किया गया।
विज्ञापन


डीएम इंद्रविक्रम सिंह और तत्कालीन जिला विद्यालय निरीक्षक बृजेश मिश्र को कार्रवाई के लिए भेजे व्हाट्सएप संदेश। सिंह ने तो खुद फोन कर मांगे थे वायरल पर्चे। फिर भी संस्कृत का प्रश्नपत्र लीक होने की सूचना सरकार को नहीं दी। जाहिर है, नकल माफिया को मिला इसका लाभ।

बलिया में तो हर साल होते हैं पेपर आउट...सामूहिक नकल आम बात

जनपद में यूपी बोर्ड परीक्षा के पेपर आउट होना नई बात नहीं हैं, यहां तो करीब-करीब हर साल ऐसा होता है। सामूहिक नकल और परीक्षा केंद्रों के बाहर कॉपियों का लिखा जाना भी आम बात है। वर्ष 2020 में इंटर गणित, भौतिक विज्ञान, हाईस्कूल गणित और अंग्रेजी के पेपर आउट हुए थे। वर्ष 2019 में इंटर भौतिक विज्ञान, जीव विज्ञान, गणित और हाईस्कूल संस्कृत का पेपर आउट हुआ था। यह सब होता है नकल माफिया और शिक्षाधिकारियों की मिलीभगत से। यही वजह है कि जब भी कोई इन्हें बेनकाब करने की कोशिश करता है प्रशासन इन्हीं पर सख्ती करने लगता है। इस बार भी ऐसा ही हुआ है।
विज्ञापन

मंत्री दयाशंकर बोले-पत्रकारों के खिलाफ कार्रवाई निंदनीय

बलिया में पत्रकारों का उत्पीड़न और जेल भेजना निंदनीय है। मैंने इसको संज्ञान में लिया है। उनको न्याय मिलेगा। यह बात बलिया सदर से विधायक एवं परिवहन राज्यमंत्री दयाशंकर सिंह ने बलिया जाते समय पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर कासिमाबाद में रविवार को पत्रकारों से कही। उन्होंने कहा कि बलिया में नकल माफिया की करतूत को उजागर करने वाले पत्रकारों के खिलाफ की गई कार्रवाई निंदनीय है। 

प्रिंसिपल और स्कूल मैनेजर कई बार गिरफ्तार हुए
साल 2020 : एसटीएफ लखनऊ की टीम ने तीन नकल माफियाओं को दबोचा। नगरा व भीमपुरा में परीक्षा के दौरान इंटर भौतिक विज्ञान, हाईस्कूल अंग्रेजी की हल प्रति वायरल हुई थी। इंटर रसायन विज्ञान प्रश्नपत्र में भी गिरोहों की सक्रियता दिखी।

38 कॉपियां, 6 साॅल्वर पकड़े
साल 2019 : इंटर गणित की परीक्षा समाप्त होने के कुछ समय पहले एसटीएफ गोरखपुर की टीम ने बाबा महेंद्र दास शहीद प्रवीण सिंह शिक्षण संस्थान छोटकी सेरिया में दबिश दी।  38 कापियों के साथ छह सॉल्वर को पकड़ लिया। प्रिंसिपल व उसका बेटा भी गिरफ्तार।

प्रिंसिपल व 4 सॉल्वर गिरफ्तार
2018 : यूपी एसटीएफ ने रसड़ा में बालेश्वर इंटर कालेज पर छापेमारी की। एसटीएफ ने स्कूल मैनेजर घर में 10वीं के गणित का पेपर हल कर रहे चार सॉल्वर सहित स्कूल के प्रिंसिपल और मैनेजर के भाई को गिरफ्तार किया था।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें