ऐसे बनाया प्लान
डॉ. लक्ष्मीकांत ओझा चंदौली में अलीनगर स्थित एक दिव्यांग विद्यालय में शिक्षक है और पुस्तकें भी लिख चुका है, उसकी कुछ पुस्तकें अभी प्रकाशित भी होने वाली हैं। लक्ष्मीकांत ने बताया कि वह अपने परिचित दूध-दही दुकानदार मनोज, बिजली मिस्त्री बाबूलाल और चाय दुकानदार जितेंद्र के बहकावे में आ गया था। तीनों ने उससे कहा था कि इस नामीगिरामी भवन की कीमत साढ़े सात करोड़ में तय हो गई तो उसे घर बैठे कमीशन का एक प्रतिशत साढ़े सात लाख रुपये आसानी से मिल जाएगा।
तीनों उसे यह भी कहते थे कि प्रधानमंत्री के संसदीय कार्यालय के भवन की बिक्री की चर्चा शहर में जोरशोर से है और हम ही लोग क्यों न अगुआ बनकर इसे बेच दें। लक्ष्मीकांत ने बताया कि वह स्मार्ट फोन को बहुत अच्छे तरीके से इस्तेमाल करना भी नहीं जानता है। उसकी मति कैसे भ्रष्ट हो गई थी और यह सब कैसे हो गया, वह समझ ही नहीं पा रहा है।