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बाबा बटुक भैरव दिलाएंगे शत्रुओं और काल के भय से मुक्ति, होंगी सभी मनोकामनाएं पूरी

Sun, 02 May 2021 09:31 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

सोमवार को है कालाष्टïमी व्रत, होगा भगवान भैरव का पूजन
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बाबा बटुक भैरव - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वाराणसी में बाबा बटुक भैरव शत्रुओं और काल के भय से मुक्ति दिलाएंगे। कृष्ण पक्ष की अष्टïमी तिथि तीन मई को कालाष्टïमी मनाई जाएगी। श्रद्धालु कालभैरव के सौम्य स्वरूप बटुक भैरव का पूजा करेंगे। काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व न्यास अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी ने बताया कि बटुक भैरव की विधि-विधान से पूजा से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

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इनकी कृपा से नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव कम होता है। कालाष्टमी का व्रत अष्टमी तिथि को रखा जाएगा। मान्यता के अनुसार जो काल भैरव के भक्तों का बुरा करता है उसे तीनों लोक में कोई शरण नहीं देता है। इस दिन पूजा करने से नकारात्मक शक्तियां दूर हो जाती हैं। भक्त भगवान भैरव के बटुक रूप की पूजा करते हैं क्योंकि वो उनका सौम्य रूप है। भगवान भैरव रौद्र स्वरूप के हैं लेकिन वे अपने भक्तों के लिए दयालु और परोपकारी हैं।

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कालाष्टमी का शुभ मुहूर्त
अष्टमी तिथि शुरू 3 मई को दोपहर 01 बजकर 39 मिनट पर
अष्टमी तिथि समाप्त 4 मई को दोपहर 01 बजकर 10 मिनट पर

कालाष्टमी पूजा विधि
कालाष्टमी के दिन सुबह उठकर स्नान कर साफ कपड़े पहनें। इसके बाद किसी शुभ स्थान पर कालभैरव की मूर्ति की स्थापना करें। फिर उस जगह को गंगाजल छिड़क कर शुद्ध करें। अब उन्हें फूल, नारियल, इमरती, पान आदि चीजें चढ़ाएं। भगवान कालभैरव के सामने धूप, दीप जलाएं और पाठ करें। इसके बाद भैरव मंत्रों का 108 बार जाप करें। आरती करने के बाद पूजा संपन्न करें।

उपाय
भगवान भैरव के रूप में इस दिन लोग कुत्ते की पूजा करते है। कालाष्टमी के दिन कुत्ते को मीठी रोटी या कच्चा दूध पिलाना चाहिए। इसके अलावा रात के समय में भगवान भैरव की सरसों के तेल, उड़द, काले तिल और दीपक आदि चीजों से पूजा अर्चना करनी चाहिए।
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