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बाबा को दान के लिए खोल दिए मनमाने खाते

Sat, 05 Sep 2015 02:09 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
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दान के रुपये लेने के लिए बाबा विश्वनाथ के मनमाना बैंक खाते खोले जाने का पता चला है। अब तक विश्वनाथ मंदिर के कर्मचारियों द्वारा अलग-अलग बैंकों में खोले गए 17 बैंक खातों का पता चला है। इन खातों में देश-दुनिया के भक्तों से दान के रुपये जमा कराए जाते थे। इसकी जानकारी मिलने के बाद उच्चाधिकारी हैरान हैं। इन बैंक खातों की जांच शुरू कर दी गई है। जांच के दौरान मंदिर के एक कर्मचारी ने अफसरों को इसकी सूची दिखाई। फिलहाल इनमें से सात खातों से लेनदेन बंद कराने का दावा किया जा रहा है।
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बाबा विश्वनाथ के दरबार में तैनात कर्मचारियों की हैरान करने वाली करतूतें एक-एक कर सामने आ रही हैं। मंडलायुक्त के निर्देश पर सीडीओ विशाख जी ने वित्तीय गड़बड़ियों की भी जांच शुरू कर दी है। बाबा के भक्तों के पैसे की बंदरबांट कैसे और किन-किन माध्यमों से होती थी, यह तो जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा लेकिन जिस तरह चीजें सामने आ रही हैं उससे बड़े गोलमाल के संकेत मिलने लगे हैं। न्यास परिषद की नौ फरवरी 2015 को हुई बैठक के कार्यवृत्त से पता चला है कि बाबा के 17 बैंक खाते खोले गए हैं। पंजाब नेशनल बैंक, इलाहाबाद बैंक, स्टेट बैंक आफ इंडिया, आईसीआईसीआई बैंक समेत कई बैंकों की शाखाओं में बाबा के खाते चलाए जाने पर न्यास परिषद ने इसे मनमानी करार देते हुए रोकने का निर्देश भी दिया।

न्यास के इस निर्देश का अनुपालन कराने के लिए तत्कालीन मुख्य कार्यपालक अधिकारी सीपीएन उपाध्याय ने पत्र भी लिखा लेकिन खाते बंद नहीं हुए। पता चला है कि कलेक्ट्रेट में कार्यपालक समिति के दफ्तर से संबद्ध किए गए एक कर्मचारी ने अफसरों को बैंक खातों के रिकार्ड के बारे में जानकारी दी है। सात बैंक खातों को बंद करा देने का दावा किया जा रहा है लेकिन मंदिर प्रशासन के रिकार्ड में अब भी 10 बैंक खाते संचालित हो रहे हैं। न्यास परिषद के अध्यक्ष आचार्य पं. अशोक द्विवेदी ने बताया कि 17 बैंक खातों का पता चलते ही एक-दो को छोड़ सभी खातों को बंद कराने का फैसला लिया गया था। गड़बड़ी किस स्तर पर हो रही है, इस पर टिप्पणी से उन्होंने इनकार कर दिया। एक उच्चाधिकारी ने नाम न छापने के आग्रह पर बताया कि बाबा के भक्तों से दान के रुपये लेने या अन्य आहरण-वितरण के लिए दो से अधिक बैंक खातों की आवश्यकता नहीं है। इसलिए दो खातों को ही रखने का निर्देश दिया गया है। हालांकि इतने खाते कैसे और क्यों संचालित हो रहे हैं? इन खातों के संचालन का मकसद क्या हो सकता है? इसे लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
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