परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। मृतका के पति विरेंद्र कुमार ने बताया कि एक तरफ उसकी पत्नी को अत्यधिक ब्लीडिंग हो रही थी तो दूसरी तरफ अस्पताल के स्टाप डिलेवरी के बाद नेग के रुप में पैसा मांगने में जुटे थे। ब्लीडिंग रोकने के लिए यदि तत्काल प्रयास शुरू कर दिया गया होता तो शायद यह स्थिति नहीं होती।
एंबुलेंस चालकों ने अस्पताल प्रशासन पर लगाया आरोप
102 व 108 एंबुलेंस चालकों का आरोप था कि अस्पताल प्रशासन की गड़बड़ी के चलते उन्हें अक्सर ही ऐसी समस्या झेलनी पड़ती है। हम मरीज को महिला अस्पताल से हॉयर सेंटर पर ही ले जा सकते है। प्राइवेट अस्पताल पर इस एंबुलेंस से मरीज पहुंचाना प्रतिबंधित है।
आशा लीलावती चालकों के साथ मरीज को प्राइवेट अस्पताल पहुंचाने के लिए जोर जबरदस्ती कर रही थी। इसमें अस्पताल की एक नर्स भी शामिल थी। आशा व प्रसूता के एक रिश्तेदार द्वारा दो एंबुलेंस के साइड ग्लास को तोड़ा गया।
चालकों का यह भी आरोप था कि अस्पताल के कर्मी सबकुछ जानते हुए भी अनैतिक काम कराने दबाव बनाते है, जिसके चलते ही ऐसी स्थिति यहां उत्पन्न होती है। एंबुलेंस चालकों ने इसकी शिकायत सीएमओ से करने की बात कही है।
पुलिस ने दर्ज किया दोनों पक्षों का बयान
हंगामे की जानकारी होते ही शहर कोतवाली पुलिस भी मौके पर पहुंच गयी और सबसे पहले आटो की व्यवस्था करा प्रसूता केे अस्पताल भेजवाया। इसके बाद एंबुलेंस चालक व तोड़फोड़ करने वाले प्रसूता के रिश्तेदार के बयान दर्ज किये।
आमने-सामने हुए एंबुलेंस चालक व अस्पताल स्टाफ
पुलिस के जाते ही अस्पताल स्टाफ व एंबुलेंस चालक आमने-सामने हो गये। चालक जहां अस्पताल के नर्स द्वारा आशा के साथ मिल कर अनैतिक दबाव बनाने की बात कह रहे थे। साथी नर्स को फंसता देख अन्य नर्सें भी वहां जुट गयी और बीच बचाव कर एंबुलेंस चालकों को समझाने बुझाने में जुट गयी।