फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आजमगढ़: महिला अस्पताल में लापरवाही, गर्भवती की हुई मौत, गुस्साए परिजनों ने की तोड़फोड़

Sun, 15 Dec 2019 06:00 PM IST
स्‍वाधीन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आजमगढ़
विज्ञापन
परिजनों को समझाती पुलिस - फोटो : ं
विज्ञापन

आजमगढ़ के जिला महिला अस्पताल में पैसे के लेनदेन व लापरवाही का एक नया मामला रविवार को सामने आया। महिला अस्पताल के स्टाप की लापरवाही के चलते प्रसूता की जान चली गई। वहीं अस्पताल प्रशासन आनन-फानन में उसे रेफर कर दिया और फिर एंबुलेंस की व्यवस्था को लेकर अस्पताल में तीमारदारों ने हंगामा व एंबुलेंस में तोड़फोड़ भी किया।

विज्ञापन


सिधारी थाना क्षेत्र के बैठौली गांव निवासिनी अरूंधती की डिलेवरी होनी थी। परिजन उसे शनिवार को जिला महिला अस्पताल लाकर भर्ती कराये थे। रविवार को दिन में लगभग 12 बजे डिलेवरी हुई। डिलेवरी के बाद अत्यधिक ब्लीडिंग के चलते प्रसूता की हालत बिगड़ने लगी। प्रसूता की देख-रेख के बजाय अस्पताल पर तैनात स्टाफ पैसे के लेन-देन में ही तीमारदारों से उलझा रहा।

हालत ज्यादा गंभीर होने पर नर्सों ने हाथ खड़े कर दिये और परिजनों से मरीज को कहीं और ले जाने को कह कर अपने जिम्मेदारी की इतिश्री कर लिया। इसके बाद परिजन व साथ आयी आशा लीलावती परिसर में खड़े 108 व 102 एंबुलेंस के पास पहुंची और चालकों से मरीज को तत्काल प्राइवेट अस्पताल ले जाने को लेकर उलझ गई।
विज्ञापन


इस दौरान दो एंबुलेंस के साइड ग्लास भी आशा व परिजनों के द्वारा तोड़ दिया गया। एक तरफ प्रसूता जीवन मौत से जूझ रही थी तो दूसरी तरफ हंगामा हो रहा था। किसी तरह परिजन आटो में प्रसूता को लाद कर सिधारी स्थित प्राइवेट अस्पताल ले गये जहां डॉक्टर ने जांच के बाद प्रसूता को मृत घोषित कर दिया।
 

क्षतिग्रस्त एंबुलेंस - फोटो : ं
परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। मृतका के पति विरेंद्र कुमार ने बताया कि एक तरफ उसकी पत्नी को अत्यधिक ब्लीडिंग हो रही थी तो दूसरी तरफ अस्पताल के स्टाप डिलेवरी के बाद नेग के रुप में पैसा मांगने में जुटे थे। ब्लीडिंग रोकने के लिए यदि तत्काल प्रयास शुरू कर दिया गया होता तो शायद यह स्थिति नहीं होती।

एंबुलेंस चालकों ने अस्पताल प्रशासन पर लगाया आरोप

102 व 108 एंबुलेंस चालकों का आरोप था कि अस्पताल प्रशासन की गड़बड़ी के चलते उन्हें अक्सर ही ऐसी समस्या झेलनी पड़ती है। हम मरीज को महिला अस्पताल से हॉयर सेंटर पर ही ले जा सकते है। प्राइवेट अस्पताल पर इस एंबुलेंस से मरीज पहुंचाना प्रतिबंधित है।

आशा लीलावती चालकों के साथ मरीज को प्राइवेट अस्पताल पहुंचाने के लिए जोर जबरदस्ती कर रही थी। इसमें अस्पताल की एक नर्स भी शामिल थी। आशा व प्रसूता के एक रिश्तेदार द्वारा दो एंबुलेंस के साइड ग्लास को तोड़ा गया।

चालकों का यह भी आरोप था कि अस्पताल के कर्मी सबकुछ जानते हुए भी अनैतिक काम कराने दबाव बनाते है, जिसके चलते ही ऐसी स्थिति यहां उत्पन्न होती है। एंबुलेंस चालकों ने इसकी शिकायत सीएमओ से करने की बात कही है।
 
विज्ञापन

मौके पर जुटी भीड़ - फोटो : ं

पुलिस ने दर्ज किया दोनों पक्षों का बयान

हंगामे की जानकारी होते ही शहर कोतवाली पुलिस भी मौके पर पहुंच गयी और सबसे पहले आटो की व्यवस्था करा प्रसूता केे अस्पताल भेजवाया। इसके बाद एंबुलेंस चालक व तोड़फोड़ करने वाले प्रसूता के रिश्तेदार के बयान दर्ज किये।

आमने-सामने हुए एंबुलेंस चालक व अस्पताल स्टाफ

पुलिस के जाते ही अस्पताल स्टाफ व एंबुलेंस चालक आमने-सामने हो गये। चालक जहां अस्पताल के नर्स द्वारा आशा के साथ मिल कर अनैतिक दबाव बनाने की बात कह रहे थे। साथी नर्स को फंसता देख अन्य नर्सें भी वहां जुट गयी और बीच बचाव कर एंबुलेंस चालकों को समझाने बुझाने में जुट गयी।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें