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आजमगढ़ हत्याकांड: अरविंद की जेब में मिलीं 18 गोलियां, बच्ची का रोना बंद हुआ तो दरवाजा तोड़ घुसने वाली थी पुलिस

Fri, 25 Sep 2026 09:56 AM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, आजमगढ़।

सार

आजमगढ़ में शंभूपुर हत्याकांड ने पूरे इलाके को दहला कर रख दिया। आरोपी मृतक अरविंद की जेब में 18 गोलियां मिलीं। अरविंद के जिस भाई की आत्मा की शांति के लिए पूजा हो रही थी उसी के रिवॉल्वर से हत्याकांड को अंजाम दिया।
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आजमगढ़ हत्याकांड के बाद मौके पर मौजूद पुलिस व आरोपी अरविंद (इनसेट में) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आजमगढ़ जिले में शंभूपुर हत्याकांड के मुख्य आरोपी अरविंद की जेब से पुलिस को 18 गोलियां मिली थीं। उसके पास रिवॉल्वर के साथ एक टॉर्च भी थी। उसे अंदेशा था कि पुलिस घर की बिजली काट सकती है। ये बात एसपी ने प्रेस कांफ्रेंस में बताई थी। एसपी ने बताया कि अरविंद के भाई सुनील के नाम पर 2005 में राइफल का लाइसेंस बना था। इसके बाद सुनील ने 2007 में रिवाल्वर का भी लाइसेंस बनवाया। सुनील की हत्या के बाद अरविंद ने 2019 में रिवाल्वर का लाइसेंस अपने नाम वरासत चढ़वा लिया। उसी रिवाल्वर से उसने इस हत्याकांड को अंजाम दिया।

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एसपी डॉ. अनिल कुमार के मुताबिक पुलिस ने तय किया था कि उस 10 बाई 15 के कमरे में सिर्फ तीन लोग घुसेंगे। निर्देश था कि कोई भी चौथा पुलिसकर्मी कमरे में नहीं घुसेगा, भले ही हम मर जाएं। हम जैसे ही कमरे में घुस तो आरोपी ने फायर झोंक दिया। इस दौरान वहां रखी अलमारी पर भी कई गोलियां लगीं।

कोई भी पुलिसकर्मी बच्चों को नहीं मार सकता: एसपी
एसपी ने सफाई दी कि कोई भी पुलिसकर्मी बच्चों को नहीं मार सकता। उनका प्रयास था कि तीनों बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालें। बच्चों को उसने बंधक बना रखा था, इसलिए अयोध्या से एटीएस को भी बुलाया गया था। कमरे में बंधक 11 महीने की बच्ची काफी रो रही थी, लेकिन कुछ देर बाद ही बच्ची का रोना भी बंद हो गया। ऐसे में पुलिस को डर था कि कहीं आरोपी ने बच्ची को मार न दिया हो। हम मौका मिलने का इंतजार कर रहे थे। हमारी ओर से तैयारी थी कि मौका मिलने पर एक-दो सेकंड में दरवाजा तोड़कर बच्चों को बचाया जाए। लेकिन, जब फायर की आवाज आई तो उन्हें दरवाजा तोड़कर अंदर घुसना पड़ा।

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मरने के छह घंटे बाद अरविंद पर दर्ज हुई प्राथमिकी
वहीं अहरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गांव में हुए इस हत्याकांड मामले में पीड़ित हिमांशु मिश्रा ने अरविंद के खिलाफ पुलिस को तहरीर दी है। अरविंद की मौत के छह घंटे बाद अहरौला थाने की पुलिस ने अरविंद के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।

पूजा में शामिल था पूरा परिवार
तहरीर में आछेपुर छितौना गांव निवासी हिमांशु मिश्रा ने बताया कि वह अपने पिता अखिलेश मिश्रा (उम्र 50 वर्ष) और इब्राहिमपुर निवासी महेंद्र प्रसाद पाठक (उम्र करीब 55 वर्ष) के साथ शंभूपुर निवासी अरविंद सिंह के घर गायत्री जप की पूजा कराने जा रहे थे। यह पूजा अरविंद सिंह की पत्नी बबिता सिंह (उम्र 35 वर्ष) करवा रही थी, जिसमें उनका पूरा परिवार शामिल था।
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बाउंड्री की दीवार कूदकर भागे हिमांशु
हिमांशु मिश्रा ने बताया कि 22 सितंबर को समय करीब 10 बजे वह अपने पिता अखिलेश मिश्रा और महेंद्र प्रसाद पाठक के साथ पूजा कराने के लिए अरविंद सिंह के घर पहुंचे। शाम करीब 5 बजे अरविंद सिंह ने पूजा का विरोध करना शुरू कर दिया और गाली-गलौज करने लगा। जब बबिता सिंह ने अपने पति को रोकने का प्रयास किया और समझाने-बुझाने की कोशिश की गई, तो अरविंद सिंह ने उग्र होकर अपने लाइसेंसी रिवाल्वर से गोली चला दी। गोली महेंद्र पाठक, अखिलेश मिश्रा और बबिता सिंह को लगी, जिससे उनकी मौके पर ही मृत्यु हो गई। हिमांशु मिश्रा ने पुलिस को बताया कि वह बाल-बाल बच गए और किसी तरह जान बचाकर बाउंड्री की दीवार कूदकर भाग गए। थाना प्रभारी राम किशोर शर्मा ने बताया कि 22 सितंबर को हिमांशु मिश्रा ने तहरीर दी थी।

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