कोई भी पुलिसकर्मी बच्चों को नहीं मार सकता: एसपी
एसपी ने सफाई दी कि कोई भी पुलिसकर्मी बच्चों को नहीं मार सकता। उनका प्रयास था कि तीनों बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालें। बच्चों को उसने बंधक बना रखा था, इसलिए अयोध्या से एटीएस को भी बुलाया गया था। कमरे में बंधक 11 महीने की बच्ची काफी रो रही थी, लेकिन कुछ देर बाद ही बच्ची का रोना भी बंद हो गया। ऐसे में पुलिस को डर था कि कहीं आरोपी ने बच्ची को मार न दिया हो। हम मौका मिलने का इंतजार कर रहे थे। हमारी ओर से तैयारी थी कि मौका मिलने पर एक-दो सेकंड में दरवाजा तोड़कर बच्चों को बचाया जाए। लेकिन, जब फायर की आवाज आई तो उन्हें दरवाजा तोड़कर अंदर घुसना पड़ा।
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बाउंड्री की दीवार कूदकर भागे हिमांशु
हिमांशु मिश्रा ने बताया कि 22 सितंबर को समय करीब 10 बजे वह अपने पिता अखिलेश मिश्रा और महेंद्र प्रसाद पाठक के साथ पूजा कराने के लिए अरविंद सिंह के घर पहुंचे। शाम करीब 5 बजे अरविंद सिंह ने पूजा का विरोध करना शुरू कर दिया और गाली-गलौज करने लगा। जब बबिता सिंह ने अपने पति को रोकने का प्रयास किया और समझाने-बुझाने की कोशिश की गई, तो अरविंद सिंह ने उग्र होकर अपने लाइसेंसी रिवाल्वर से गोली चला दी। गोली महेंद्र पाठक, अखिलेश मिश्रा और बबिता सिंह को लगी, जिससे उनकी मौके पर ही मृत्यु हो गई। हिमांशु मिश्रा ने पुलिस को बताया कि वह बाल-बाल बच गए और किसी तरह जान बचाकर बाउंड्री की दीवार कूदकर भाग गए। थाना प्रभारी राम किशोर शर्मा ने बताया कि 22 सितंबर को हिमांशु मिश्रा ने तहरीर दी थी।