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राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020: डीएलएड के लिए तैयार की गईं दो किताबें, अगले सत्र से होंगी लागू; ऑनलाइन पढ़ सकेंगे

Fri, 25 Sep 2026 09:30 AM IST
Pragati Chand अभिषेक मिश्र, अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी।

सार

एनईपी 2020 के तहत डीएलएड के लिए दो किताबें तैयार की गईं। अगले सत्र से प्रदेशभर के डायट में लागू होंगी। अब तक किताब के प्रारूप में स्टडी मैटेरियल नहीं उपलब्ध था।
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books - फोटो : adobestock
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विस्तार
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प्रदेश में शिक्षक तैयार करने वाले दो वर्षीय डीएलएड पाठ्यक्रम को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की अपेक्षाओं के अनुरूप और अधिक व्यावहारिक बनाने की दिशा में दो नई पाठ्यपुस्तकें तैयार की गई हैं। बाल विकास और सीखने की प्रक्रिया तथा शिक्षण अधिगम के सिद्धांत विषय की इन पुस्तकों को अगले प्रशिक्षण सत्र से डीएलएड पाठ्यक्रम में लागू किया जाएगा। किताबें ऑनलाइन उपलब्ध होंगी। वाराणसी के एलटी कॉलेज में बनाई गई इन दोनों किताबों को प्रदेश के सभी 70 जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) में अगले सत्र से लागू किया जाएगा।

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किताबें बनाने के पहले वाराणसी एलटी कॉलेज के अधीन 6 मंडल वाराणसी, आजमगढ़, मिर्जापुर, गोरखपुर, बस्ती और देवीपाटन के 21 जिलों के शिक्षकों का प्रशिक्षण कार्यक्रम हुआ। शिक्षकों द्वारा बताई गईं समस्याओं का समाधान करते हुए, सरल भाषा में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने किताबें तैयार की गईं। दोनों किताबों को एससीईआरटी में अनुमति के लिए भेजा गया है। अनुमति मिलने के बाद अगले सत्र से इन्हें लागू किया जाएगा।

पहली किताब में बाल विकास की मूल अवधारणा की जानकारी
बाल विकास एवं सीखने की प्रक्रिया किताब में विषय में बाल विकास की मूल अवधारणा से विषय की शुरुआत की गई है। इसमें बच्चे के शारीरिक, मानसिक, संवेगात्मक, सामाजिक और नैतिक विकास के विभिन्न आयामों को उदाहरणों के साथ समझाया गया है। पुस्तक में बालक के व्यक्तित्व विकास को समझने के साथ-साथ उसकी विशेषताओं और विकास की तकनीकों पर भी सामग्री दी गई है।

दूसरी पुस्तक में शिक्षक बनने की पूरी प्रक्रिया पर फोकस
दूसरी पुस्तक शिक्षण अधिगम के सिद्धांत में भावी शिक्षकों को शिक्षण की अवधारणा से लेकर आधुनिक कक्षा-कक्ष में इस्तेमाल होने वाली विभिन्न विधियों तक की जानकारी दी गई है। पुस्तक में कुल 10 प्रमुख अध्यायों के माध्यम से शिक्षण-अधिगम की प्रक्रिया को समझाया गया है। पहले अध्याय में शिक्षण की संकल्पना, स्वरूप एवं महत्व को समझाया गया है। इसके बाद संप्रेषण को शिक्षण प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हुए प्रभावी संचार के घटकों और कक्षा में उसके उपयोग पर सामग्री दी गई है। तीसरे अध्याय में शिक्षण के सूत्र के माध्यम से शिक्षण को सरल से जटिल, ज्ञात से अज्ञात और मूर्त से अमूर्त की ओर ले जाने जैसी अवधारणाओं को उदाहरणों के साथ समझाया गया है।

ब्लूम टैक्सोनॉमी से लेकर पाठ योजना तक
पुस्तक में ब्लूम के संशोधित शैक्षिक उद्देश्यों के वर्गीकरण को भी शामिल किया गया है। इसके माध्यम से प्रशिक्षुओं को यह समझाने का प्रयास किया गया है कि पाठ पढ़ाते समय केवल जानकारी देना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि विद्यार्थियों में समझ, अनुप्रयोग, विश्लेषण और अन्य उच्च स्तरीय क्षमताओं के विकास को भी ध्यान में रखना जरूरी है। इसके अलावा पाठ योजना को भी पुस्तक में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।
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नई किताबों में खास
  • एनईपी-2020 की भावना के अनुरूप पाठ्य सामग्री
  • बाल विकास के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, संवेगात्मक और नैतिक पक्ष
  • बुद्धि, अधिगम, संवेगात्मक बुद्धि, स्मृति और अभिप्रेरणा
  • ब्लेंडेड, फ्लिप्ड और पीयर लर्निंग व स्टीम और गेमिफिकेशन - माइक्रो टीचिंग और सिमुलेटेड टीचिंग, ब्लूम की संशोधित टैक्सोनॉमी - पाठ योजना निर्माण और शिक्षण-अधिगम सामग्री
  • सिद्धांतों को कक्षा की वास्तविक परिस्थितियों से जोड़ने पर जोर

अधिकारी बोले
डीएलएड के कोर्स में अगले सत्र के लिए दो नई किताबें विकसित की गई हैं। स्वीकृति के लिए एससीईआरटी भेजी गई हैं। यह किताबें ऑनलाइन उपलब्ध होंगी। पहले अलग-अलग टॉपिक के अनुसार स्टडी मैटेरियल उपलब्ध होते थे। किताब होने से छात्रों को पढ़ने में आसानी होगी। -डॉ. ऋचा जोशी, प्रभारी प्राचार्य एलटी कॉलेज, वाराणसी

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