फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा ऑटो मोटर पार्ट्स का कारोबार

विज्ञापन
विज्ञापन
कोरोना काल में ऑटो मोटर पार्ट्स कारोबारियों की आमदनी पर ब्रेक लग गया है। पहली और दूसरी लहर ने कारोबार की गाड़ी को ही बेपटरी कर दिया। गोदाम में डंप पडे़े माल और मई माह में पूर्ण रूप से दुकानों की बंदी ने कारोबारियों को जबरदस्त झटका दिया। हालत यह है कि दो हजार मैकेनिकों और 200 से अधिक मोटर पार्ट्स कारोबारियों के परिवारों पर रोजीरोटी का संकट छाया हुआ है। फिलहाल बाजार खुले जरूर हैं, लेकिन रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है। कंपनियों के माल अब तक नहीं बिके और पूर्वांचल के विभिन्न जनपदों में भेजे माल की बिक्री नहीं होने से पूंजी फंसी पड़ी है। मोटर पार्ट्स के दामों में जबरदस्त उछाल और दुकान, गोदाम किराया, बिजली बिल, बैंक ब्याज, कर्मचारियों की तनख्वाह और अन्य खर्चे निकालने में कारोबारी अपनी जमा पूंजी खर्च कर रहे हैं। कारोबारियों के अनुसार कोरोना काल में ऑटो मोटर पार्ट्स कारोबार का लगभग 200 करोड़ का टर्न ओवर प्रभावित हुआ है। खर्चे कम करने के लिए व्यापारी कर्मचारियों की संख्या भी कम करने लगे हैं। पार्ट्स इतनेे महंगे हो गए हैं कि ग्राहक भी लौट जा रहे हैं। कारोबारियों का कहना कि सरकार अगर कच्चे माल के दामों को कम करे तो राहत मिल सकती है। साथ ही बिजली बिल और बैंक के ब्याज में भी छूट की मांग की।
विज्ञापन

दुकान बंद करने के कगार पर कारोबारी
वाराणसी मोटर पार्ट्स डीलर एसोसिएशन के अध्यक्ष विनय गुप्ता ने बताया कि जो दुकान 20 लाख में भर जाती थी इस समय 25 लाख में भी नहीं भर पा रही हे। कच्चे माल के दामों में वृद्धि से मोटर पार्ट्स महंगे मिल रहे हैं। ट्रांसपोर्ट भाड़ा भी बढ़ चुका है। ऐसे ही हालत खराब है। मध्यम वर्ग के कारोबारी टूट चुके हैं। दुकान बंद करने की नौबत आ गई है।
नहीं हो रही बोहनी
वाराणसी नदेसर ऑटो पार्ट्स समिति के अध्यक्ष सुजीत गुप्ता ने बताया कि कोरोना काल में कारोबार की स्थिति ठीक नहीं है। बस व्यापारी दुकान खोलकर बैठे हैं। ग्राहकों के इंतजार में सुबह से शाम हो रहा, लेकिन बोहनी नहीं हो रही है। खर्चे कम करने के लिए कारोबारियों ने कर्मचारियों की संख्या कम कर दी, गोदाम बदल दिया।
विज्ञापन

इनकम कम, खर्चों का मीटर चालू
नदेसर मोटर पार्ट्स एसोसिएशन के महामंत्री सत्यप्रकाश सराफ ने बताया कि मई में पूर्ण रूप से दुकानें बंद रहीं लेकिन खर्चों का मीटर चालू ही रहा। बिजली बिल, कर्मचारियों की तनख्वाह, किराया यह तो देना ही पड़ा। पहली लहर के झटके से उबरने की कोशिश में थे कि दूसरी लहर ने कमर तोड़ दी। विभिन्न जनपदों से आने वाले खरीदारों में 50 फीसदी की कमी आई है।
बीमारी की ओर बढ़ रहे दुकानदार
कारोबारी अखिलेश सिंह ने बताया कि कोरोना ने मोटर पार्ट्स के लगभग सभी कारोबारी कर्ज के बोझ तले दबे जा रहे हैं। बैंक का ब्याज, बिजली का बिल, कर्मचारियों का वेतन, किराए की चिंता ने व्यापारियों को मानसिक रोगी बनाना शुरू कर दिया है। कारोबारियों की पूंजी फंसी हुई है। दूरदराज के खरीदार भी अब नदारद हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें