इसी से क्षुब्ध होकर दुष्कर्म पीड़िता व गवाह ने आत्महत्या कर ली। पीड़िता की ओर से सोशल मीडिया पर भी अमरेश को दोषी बताया गया था। बुधवार रात 12 बजकर 47 मिनट पर लंका थाने में मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने अपराध शाखा परिसर से सुबह साढ़े आठ बजे गिरफ्तारी दिखाई।
अदालत में आरोपी का न्यायिक रिमांड बनाए जाने का अधिवक्ता मनोज यादव ने विरोध किया। कहा कि एक ही अपराध में पहले दिल्ली फिर हजरतगंज अब बनारस में मुकदमा दर्ज किया जाना विधि विरुद्ध है। आरोपी निर्दोष है। इस प्रकरण की जांच एसआईटी पहले से ही कर रही है।
उधर, एपीओ अनुराग त्रिपाठी की दलील थी कि आरोपी के खिलाफ रिमांड बनाने का पर्याप्त आधार है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायिक रिमांड बनाकर बघेल को जेल भेजा। वहीं कचहरी में अधिवक्ताओं और अन्य मीडिया कर्मियों को अमरेश बघेल के पास जाने से रोका गया। इसके लेकर अधिवक्ताओं ने काफी हो हल्ला भी मचाया। अंतत: पेशी के बाद तगड़ी सुरक्षा के दौरान वाहन से बघेल को जिला जेल भेज दिया गया।