संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में ऑनलाइन प्रशिक्षण केंद्र से ज्योतिष, कर्मकांड और पौरोहित्य का डिप्लोमा व सर्टिफिकेट मिलेगा। संस्कृत के माध्यम से पौरोहित्य प्रशिक्षण, मंदिरों में अर्चक, तीर्थ, श्राद्ध में पौरोहित्य कार्य के प्रशिक्षण, ज्योतिष शास्त्र एवं कर्मकांड का पाठ्यक्रम संचालित किया जाएगा। इसके साथ ही घर बैठे भी संस्कृत का ज्ञान लिया जा सकेगा।
कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी की अध्यक्षता में सोमवार को योग साधना केंद्र में हुई कार्य परिषद की बैठक में नए पाठ्यक्रम को स्वीकृति मिल गई और वित्त समिति की संस्तुतियों पर भी मुहर लग गई। केंद्र से ऑनलाइन माध्यम से कंप्यूटर का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। विश्वविद्यालय से जुड़े संबद्ध महाविद्यालयों के छात्रों सहित कुल 60 हजार लोगों को सीधे लाभ मिलेगा। नेट, जेआरएफ एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में भी यह सेंटर कारगर होगा। बैठक में आयुर्वेद कॉलेज के पुराने भवन को वापस लेने, परिसर की दो एकड़ जमीन पर विश्वविद्यालय का नाम दर्ज कराने, पांडुलिपि संरक्षण और प्रकाशन समिति के कार्यवृत्त को भी अनुमोदन मिला। बैठक में कार्यपरिषद सदस्य इलाहाबाद हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान, डॉ. अरुण कुमार राय, प्रो. सुधाकर मिश्र, कुलसचिव डॉ. ओमप्रकाश, परीक्षा नियंत्रक अर्चना जौहरी, प्रो. रमेश प्रसाद, प्रो. राजनाथ, प्रो. हीरककान्ति चक्रवर्ती, प्रो. महेंद्र पांडेय, डॉ. विजय पांडेय, डॉ. विजय शर्मा, डॉ. सत्येंद्र यादव, उप कुलसचिव केसलाल, सहायक कुलसचिव चंद्रनाथ मिश्र उपस्थित थे।
न्यायमूर्ति का कुलपति ने किया स्वागत
वाराणसी। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय कार्यपरिषद (न्यायिक) की सदस्य और इलाहाबाद हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति मंजूरानी चौहान का कुलपति ने सोमवार सुबह स्वागत किया। वाराणसी पहुंचीं न्यायमूर्ति से कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी ने सर्किट हाउस में मुलाकात की और पुष्पगुच्छ देकर उनका अभिनंदन किया। कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय के विकास में न्यायमूर्ति का हमेशा सहयोग मिलता है। न्यायमूर्ति मंजू रानी ने कहा कि इस विश्वविद्यालय की सुगंध प्राच्य विद्या के माध्यम से संपूर्ण देश में है इसकी गरिमा-महिमा की रक्षा करना सभी का कर्तव्य है। हम अपनी परंपरा और मूल उद्देश्य को बनाए रखें। ब्यूरो