तकरीबन हर साल ऐसा होता है जब एक ही राशि में पांच ग्रह आ जाते हैं। सूर्य हर महीने राशि बदलता है। ज्योतिष में बुध और शुक्र को अनुचर ग्रह कहा जाता है। यानी ये दोनों ग्रह सूर्य के आसपास ही रहते हैं। कई बार ऐसा होता है जब ये एक ही राशि में आ जाते हैं। इनके अलावा चंद्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है। ये चारो ग्रह एक साल में हर राशि से होकर गुजरते हैं। इस दौरान जब मंगल, शनि, बृहस्पति या राहु-केतु के साथ ये आते हैं तो पंचग्रही योग बन जाता है।
सालों में बनता है षड्ग्रही योग
ज्योतिषाचार्य पं. गणेश मिश्र ने बताया कि पांच ग्रहों का योग तो तकरीबन हर साल बनता है, लेकिन कई सालों में एक बार ऐसा होता है जब छह ग्रह एक ही राशि में आ जाएं। ऐसी ग्रह स्थिति को षड्ग्रही योग कहा जाता है। ज्योतिष ग्रंथों में इस योग को अशुभ फल देने वाला माना जाता है। मयूरचित्रकम सहित कुछ संहिता ग्रंथों में कहा गया है कि जब एक ही राशि में छह ग्रह आ जाए तो दुर्घटनाएं बढ़ती हैं। प्राकृतिक आपदाएं और मौसम में अचानक बदलाव होने लगता है। इन ग्रहों के कारण राजा यानी बड़े पद पर मौजूद लोग, बड़े नेता और प्रशासनिक अधिकारियों के लिए तनाव और बदलाव का समय होता है।
इससे पहले पांच ग्रहों का योग
पिछले साल 10 जनवरी 2020 को चंद्र ग्रहण के साथ धनु राशि में सूर्य, बुध, गुरु, शनि और केतु एक साथ थे। इसके चलते देश में अराजकता फैली थी। आंदोलन हुए थे। देश की जनता में असंतुष्टि थी। इन ग्रहों के अशुभ असर से ही राजधानी दिल्ली में दंगे हुए थे। इसके पहले 26 दिसंबर 2019 को सूर्य ग्रहण के साथ धनु राशि में सूर्य, बुध, गुरु, शनि, केतु और चंद्रमा एक साथ आए थे। इससे षड्ग्रही योग बना था। ज्योतिषीयों की मानें तो ग्रहों की इस अशुभ स्थिति से आर्थिक मंदी का सामना करना पड़ा।