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वाराणसी: विलुप्त नहीं होगी असि और वरुणा नदी, 106 करोड़ से हरित पट्टी विकसित की जाएगी

Sat, 16 Sep 2023 05:38 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

विलुप्त होने के कगार पर पहुंच चुकी असि और वरुणा नदी के उद्धार का रास्ता साफ हो गया है। इसके लिए 108.07 करोड़ की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की गई है। इसे नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (एनएमसीजी) को भेजा जा चुका है। 
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वरुणा नदी का हाल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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विलुप्त होने के कगार पर पहुंच चुकी असि और वरुणा नदी के उद्धार का रास्ता साफ हो गया है। इसके लिए 108.07 करोड़ की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की गई है। इसे नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (एनएमसीजी) को भेजा जा चुका है। इसके मुताबिक, नदियों के किनारे हरित पट्टी तैयार की जाएगी। बायोडायवर्सिटी पार्क भी बनेगा। इसमें औषधीय पौधे लगाए जाएंगे। बायोडायवर्सिटी पार्क ही लुप्त हो रहे जीव-जंतु व पक्षियों का ठौर बनेगा। वरुणा नदी वाराणसी, प्रयागराज और भदोही को जोड़ती है।

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वरुणा नदी के 202 किलोमीटर क्षेत्र में हरित पट्टी विकसित होगी। इसी तरह असि नदी के किनारे आठ किमी में हरित पट्टी विकसित की जाएगी। इस परियोजना में वीडीए, नगर निगम, जल निगम, वन विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी सहयोग करेगा। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की निगरानी समिति ने असि और वरुणा नदी के किनारे हरित पट्टी को धरातल पर लाने की जिम्मेदारी वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) को दी थी। अफसरों ने कई बार निरीक्षण किया और रिपोर्ट एनजीटी को भेजी।

इसी बीच ट्रिब्यूनल ने पर्यावरण और इको सिस्टम पर काम करने वाली दिल्ली की संस्था सेंट्रल फॉर इनवायरमेंटल मैनेजमेंट ऑफ डीग्रेडेड इकोसिस्टम (सीईएमडीई) को डीपीआर बनाने की जिम्मेदारी दी। संस्था ने एक सप्ताह पहले रिपोर्ट तैयार करके सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता (बंधी) राजेश यादव को दी। अधिशासी अभियंता ने यही रिपोर्ट गत बृहस्पतिवार को ही एनएमसीजी को भेजी है।

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नालों की सफाई के लिए बनेंगे सीडब्ल्यूएस

असि व वरुणा नदी में गिरने वाले नालों के पास कंस्ट्रक्टेड वेटलैंड सिस्टम ( सीडब्ल्यूएस) लगेगा। इसके जरिये नालों के पानी को शोधित किया जाएगा। कंदवा और कर्दमेश्वर तालाब की भी सफाई होगी।

बायोडायवर्सिटी पार्क में होंगे देसी-विदेशी पौधे

सरायमोहाना के पास वरुणा नदी के किनारे बायोडायवर्सिटी पार्क बनेगा तो दूसरा दशाश्वमेध घाट के सामने गंगा पार बनाया जाएगा। इसमें देसी-विदेशी घास, जड़ी बूटियों के पौधे लगाए जाएंगे। दिल्ली में इस तरह के पार्क विकसित किए गए हैं, जो कि इको सिस्टम को संतुलित करता है। दोनों नदियों के किनारे पिकनिक स्पॉट विकसित होगा।
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वरुणा के उद्गम मैलहन झील की होगी खोदाई

वरुणा नदी का उद्गम प्रयागराज जिले के फूलपुर ब्लाॅक के मैलहन झील है। इसकी भी खोदाई कराई जाएगी। यह नदी भदोही से होकर वाराणसी तक आती है, फिर गंगा में समाहित होती है। इसकी कुल दूरी 202 किमी है। इस परियोजना के तहत मैलहन झील को भी विकसित किया जाएगा। क्योंकि, वर्तमान में यह झील समतल हो गई है।
हटाए जाएंगे अवैध निर्माण
हरित पट्टी में अवैध निर्माण वीडीए हटवाएगा। इसकी वजह से हरित पट्टी का कार्य प्रभावित होगा। असि और वरुणा दोनों पर अवैध निर्माण हुए हैं। असि नदी का तो अस्तित्व ही खत्म होने के कगार पर है तो वरुणा नदी नाले में तब्दील हो गई है। असि से कंदवा तक करीब डेढ़ हजार अवैध कब्जेदार हैं। इसी तरह वरुणा नदी के आसपास भी कब्जेदारों की भरमार है।
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