असि व वरुणा नदी में गिरने वाले नालों के पास कंस्ट्रक्टेड वेटलैंड सिस्टम ( सीडब्ल्यूएस) लगेगा। इसके जरिये नालों के पानी को शोधित किया जाएगा। कंदवा और कर्दमेश्वर तालाब की भी सफाई होगी।
बायोडायवर्सिटी पार्क में होंगे देसी-विदेशी पौधे
सरायमोहाना के पास वरुणा नदी के किनारे बायोडायवर्सिटी पार्क बनेगा तो दूसरा दशाश्वमेध घाट के सामने गंगा पार बनाया जाएगा। इसमें देसी-विदेशी घास, जड़ी बूटियों के पौधे लगाए जाएंगे। दिल्ली में इस तरह के पार्क विकसित किए गए हैं, जो कि इको सिस्टम को संतुलित करता है। दोनों नदियों के किनारे पिकनिक स्पॉट विकसित होगा।
वरुणा नदी का उद्गम प्रयागराज जिले के फूलपुर ब्लाॅक के मैलहन झील है। इसकी भी खोदाई कराई जाएगी। यह नदी भदोही से होकर वाराणसी तक आती है, फिर गंगा में समाहित होती है। इसकी कुल दूरी 202 किमी है। इस परियोजना के तहत मैलहन झील को भी विकसित किया जाएगा। क्योंकि, वर्तमान में यह झील समतल हो गई है।
हटाए जाएंगे अवैध निर्माण
हरित पट्टी में अवैध निर्माण वीडीए हटवाएगा। इसकी वजह से हरित पट्टी का कार्य प्रभावित होगा। असि और वरुणा दोनों पर अवैध निर्माण हुए हैं। असि नदी का तो अस्तित्व ही खत्म होने के कगार पर है तो वरुणा नदी नाले में तब्दील हो गई है। असि से कंदवा तक करीब डेढ़ हजार अवैध कब्जेदार हैं। इसी तरह वरुणा नदी के आसपास भी कब्जेदारों की भरमार है।