देश की सांस्कृतिक, भौगोलिक विशिष्टता को ग्लोबल स्तर पर पहचान प्रगाढ़ के कार्य हो रहे हैं। वाराणसी के 12 जीआई प्रोडक्ट को संरक्षित करने का कार्य कर लिया गया है। इस संरक्षण से विश्व में पहचान बढ़ेगी। इसकी बड़ी भूमिका होगी। ग्लोबल स्तर पर भारत की भूमि, कारीगरों को पहचान व सम्मान मिल रहा है। उक्त बातें राज्य मंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी ने मंगलवार को आठ जीआई प्रमाण पत्र कार्यक्रम और जीआई जागरूकता संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि वर्चुअल कहीं।
कंट्रोलर जनरल पेटेंट, डिजाइन, ट्रेडमार्क एवं जीआई रजिस्ट्री व प्रदेश सरकार की ओर से कमिश्नरी ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के आठ जीआई उत्पाद रातोल मैंगो, महोबा देशवारी पान, बनारस जरदोजी काफ्ट, चुनार ग्लेज पोर्टली, मिर्जापुर पीतल बर्तन, बनारस वुड कार्विंग, बनारस हैंड ब्लॉक प्रिंट व मऊ साड़ी का जीआई सर्टिफिकेट संबंधित एप्लीकेंट व संबंधित फेसिसलेटर को हस्तगत किया गया।
कमिश्नर दीपक अग्रवाल ने हस्त शिल्पियों को स्किल व मैटेरियल से ग्लोबल मांग के अनुरूप और अन्य उत्पाद बनाने पर जोर दिया। पहला अवसर है कि इतने अधिक एक साथ जीआई सर्टिफिकेट बनारस में हैंड ओवर किया गया। संगोष्ठी में जीआई के लिए आवेदन, पंजीकरण, संक्षिप्त प्रक्रिया और सामान्य मुद्दों पर प्रकाश डाला गया। जीआई में होने वाले लाभों की जानकारी दी गई। इस अवसर पर डीपीआईटीटी के वरिष्ठ अधिकारी, नाबार्ड के अधिकारी, जीआई रजिस्ट्रेशन से संबंधित अधिकारी सहित काफी संख्या में विभिन्न उत्पादक समूह के प्रतिनिधि आदि उपस्थित थे। संचालन पद्मश्री डॉ. रजनीकांत और धन्यवाद ज्ञापित जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने किया। अतिथियों की जीआई प्रोडक्ट का अंग वस्त्र व स्मृति चिन्ह भेंट किया गया।