काशी में अतुल्य भारत धरोहर शृंखला के तहत हुई ‘संगीत माला’ की शानदार शुरुआत ने पर्यटन मंत्रालय के लिए संभावनाओं के नए द्वार खोल दिए हैं। इसी साल पर्यटन मंत्रालय ने ‘सबके लिए पर्यटन’ के अपने उद्देश्य को धार देने के लिए यह पहल शुरू की।
देश की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहरों को वहां के कला-संगीत के जरिए नए रूप में सामने लाने और सैलानियों-आम लोगों को इससे रूबरू कराने के लिए पहले साल दिल्ली, कोच्चि और काशी में संगीता माला की शृंखलाएं आयोजित हुईं।
इनकी सफलता से उत्साहित मंत्रालय ने अगले साल इस शृंखला से प्रयाग, मथुरा, जयपुर जैसे आधा दर्जन प्राचीन शहरों को जोड़ने की तैयारी की है। कला-संस्कृति, संगीत के जरिए पर्यटन को बढ़ावा देने और धरोहरों के संरक्षण-प्रोत्साहन की इस शृंखला के तहत दो दिवसीय आयोजन वाराणसी के अस्सी घाट पर हुआ। जिसका समापन रविवार को हुआ।
स्पिक-मैके के सहयोग से हुई इस संगीता माला में सितार वादक उस्ताद शाहिद परवेज खान, शास्त्रीय गायक डॉ. अश्विनी भिड़े देशपांडे, बाउल संगीतकार और लोकगायिका पार्वती बाउल, कव्वाली गायक वारसी बिरादरान, वायलिन वादक डॉ. एल सुब्रमण्यम, मृदंग वादक डॉ. उमायलपुरम के सिवारामन, संतूर वादक पंडित शिव कुमार शर्मा के अलावा मालिनी अवस्थी (ठुमरी), तीजन बाई (पंडवानी), बांसुरी वादक पं. हरिप्रसाद चौरसिया, प्रह्लाद सिंह टिपानिया (कबीर गायन), श्रुति साडोलिककर की प्रस्तुतियां हुईं। कलाकारों ने भी पर्यटन मंत्रालय की इस पहल को सराहा।