नई शिक्षा नीति के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों को प्री प्राइमरी स्कूल के रूप में संचालित किया जाना है। साथ ही प्राथमिक विद्यालय की तर्ज पर यहां प्री प्राइमरी तक के बच्चों की कक्षाएं शुरू होनी हैं, लेकिन अभी जिले के 3914 आंगनबाड़ी केंद्रों पर कक्षाएं चलाए जाने की तैयारी ही अधूरी है। दरअसल, न तो अभी तक तीन साल तक के बच्चों का पंजीकरण पूरा हुआ है, न 300 से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को पढ़ाने का प्रशिक्षण दिया गया है।
जिले में आंगनबाड़ी केंद्र पर मानक के अनुसार, 3914 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं होनी चाहिए, लेकिन इस समय दोनों को मिलाकर 679 पद खाली हैं। वहीं, आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों का पंजीकरण कराने की जिम्मेदारी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका को दी गई है। जल्द पंजीकरण पूरा कराकर कक्षाएं शुरू कराई जा सकें, इसके लिए ब्लॉक स्तर पर नियुक्त अधिकारियों की ओर से सूची तैयार की जा रही है।
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केंद्रों पर किताबों का इंतजार
आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को पढ़ाने के लिए अभी कई केंद्रों को पर्याप्त किताबेें नहीं मिली हैं। नियमानुसार यूनिसेफ की ओर से पुस्तकें दी जानी हैं। हरहुआ, आराजीलाइन, चिरईगांव समेत कई ब्लॉकों में अभी किताबें नहीं आई हैं।
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आज केंद्रों पर बच्चों का रहेगा इंतजार
कोरोना काल में शासन ने सोमवार और बृहस्पतिवार को ही केंद्र खोेले जाने का निर्णय लिया है। सोमवार को काशी विद्यापीठ ब्लॉक, आराजीलाइन, पिंडरा ब्लॉक आदि ब्लॉकों में पहले दिन अधिकांश केंद्रों पर बच्चे नहीं पहुंचे। अब बृहस्पतिवार को बच्चे आएं तो आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को राहत मिले।
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अधिक से अधिक बच्चों का पंजीकरण हो सके, इसके लिए कोरोना काल में भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं ने घर-घर पहुंचकर बच्चों का पंजीकरण किया। अभिभावकों को भी जागरूक किया जा रहा है। 300 से अधिक कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण होना बाकी है। इसकी तैयारी चल रही है। कक्षाएं संचालन के लिए किताब सहित अन्य व्यवस्थाएं भी की जा रही हैं।-दुर्गेश प्रताप सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी