जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी की जयंती पर मंगलवार को चांदी के सुसज्जित रथ पर निकाली गई शोभायात्रा में अनुयायियों का सैलाब उमड़ पड़ा। कहीं चैती की धुन गूंजी तो कहीं सड़कों पर सामूहिक नृत्य की थिरकन। डांडिया रास के साथ झूमते-नाचते निकले जैन धर्मावलंबियों की झलक पाने के लिए छतों, बारजों पर लोग निकल पड़े। भेलूपुर जैन मंदिर में 108 कलशों से पंचाभिषेक किया गया।
‘जियो और जीने दो’ के अलावा ‘अहिंसा परमो धर्म’ के संदेश के साथ निकाली गई। दिगंबर जैन समाज काशी की ओर से 2615वीं जयंती पर निकाली गई शोभायात्रा में जमकर पुष्पवर्षा हुई। मैदागिन से बुलानाला, नीचीबाग, आसभैरो, चौक, ठठेरी बाजार होते हुए सोराकुआं पहुंची। वहां से सुबह ग्वाल दास साहू लेन स्थित दिगंबर जैन मंदिर में भगवान जैन महावीर स्वामी का रजत कलशों से अभिषेक किया गया। चैत्र शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को भगवान महावीर स्वामी का जन्म होने की खुशी में महिलाएं चैती गा रही थीं। बोल थे- धन-धन चैत की तेरस रामा भए महावीरा...। रथ को भक्त खींच रहे थे। राजस्थान से आई भजन मंडली और सज धज कर निकलीं महिलाएं भजनों का गान कर रही थीं। बैंड पार्टियां धार्मिक धुनें बजाकर माहौल को भक्तिमय बना रही थीं। बच्चे घोड़ों पर सवार होकर चल रहे थे।
रजत हाथी के अलावा चंवर गाड़ी, धूप गाड़ी, झंडी गाड़ी, रजत नालकी आकर्षण का केंद्र बनी हुई थी। इंद्रगण भगवान को चंवर डुला रहे थे। पुरुष पारंपरिक वेश में केसरिया दुपट्टा ओढ़े भगवान महावीर के संदेशों का गुणगान कर रहे थे।महिलाएं पुष्पवर्षा कर रही थीं। जगह-जगह शोभायात्रा की आरती उतारी जा रही थी। सोराकुआं से निकलने के बाद चौक, बांसफाटक, गोदौलिया, पांडेयहवेली, सोनारपुरा से होकर शोभायात्रा भेलूपुर पहुंची। उधर, नरिया स्थित जैन मंदिर में भगवान महावीर विशाल प्रतिमा का अभिषेक किया गया। शोभायात्रा में जयकृष्ण जैन, दीपक जैन, अरुण जैन, राजेश जैन, विनोद जैन, अनिल प्रसाद जैन, आलोक जैन, ललित पोद्दार समेत तमाम लोग शामिल थे। श्वेतांबर जैन समाज की ओर से भी महावीर स्वामी की जयंती पर भव्य शोभायात्रा निकाली गई।