गुरुवार को अर्घ्य का आधा हिस्सा ही साफ हो सका है लेकिन यह स्पष्ट है कि अरघा पूरी तरह चौकोर है। उत्तर की तरफ जहां से मंदिर का पानी आगे की निकलने का प्रमाण मिल रहा है, वह नुकीला और 16 सेंटीमीटर लंबा है। इस स्थान को जल प्रणाल कहते हैं।
ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि वह आगे की ओर किसी पशु की मुखाकृति जैसे पत्थर से जुड़ा हो सकता है, जिससे पानी अर्घ्य से बाहर निकलता रहा होगा। गड्ढे में मजदूरों के साथ लगातार लगे रहने वाले रिसर्च स्कॉलर डॉक्टर रविशंकर और डॉक्टर संदीप ने बताया कि गर्भ गृह दो मीटर के वर्गाकार क्षेत्र में है, जबकि अरघा 1 मीटर के आकार में दिख रहा है।
यहां मिले इस प्राचीन अवशेष को लेकर कहा जा रहा है कि गुप्त काल में मंदिर में ईटों का प्रयोग कम ही जगहों पर देखने को मिलते है। मंदिर का ऐसा अवशेष कानपुर में भीतरी गांव में मिला है। गुरुवार को खुदाई में लौह अयस्क भी भारी संख्या में मिले।
जैसे-जैसे यहां की खुदाई के बारे में और शिवलिंग मिलने की चर्चा आसपास के गांव के लोगों को पता चल रही है, मौके पर पहुंचने वालों की भारी भीड़ लगती जा रही है। बुधवार की रात हुई हल्की बूंदा बादी को देखते हुए के गुरुवार को बारिश की संभावना को देखते हुए गड्ढे को प्लास्टिक के कवर से ढक दिया गया, ताकि गड्ढे में पानी न जाए। स्थिति यह है कि बभनियाव गांव में लोग घर-घर सभी समाचार पत्रों के संस्करण खरीद कर संग्रहित कर रहे हैं। समाचार पत्र विक्रेता शॉर्टेज के चलते गांव में अखबार नहीं दे पाता है।