बीएचयू में नई शिक्षा नीति के तहत पुरातत्व जंतु विज्ञान नाम से तीन क्रेडिट का एक मल्टी डिसिप्लिनरी कोर्स शुरू किया गया है। इसमें सिंधु-सरस्वती घाटी, नीएंडरथल मानवों और डीएनए तकनीक समेत अतीत के विज्ञान से जुड़े हजारों तथ्य सामने आएंगे। इसकी कक्षा लेने के लिए देश भर के विद्वानों को बीएचयू बुलाया जाएगा। इस कोर्स की पढ़ाई बीएससी तीसरे सेमेस्टर में होगी।
जंतु विज्ञान विभाग के प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे ने इस कोर्स को डिजाइन किया है। इसमें छात्रों को पुरातत्व से जोड़कर मानव और पशु अवशेषों का अध्ययन कराया जाएगा। कोर्स में मानव विकास पर खास फोकस किया गया है। यह दक्षिण एशिया के प्रागैतिहासिक कालखंड यानी कि 25 लाख ईसा पूर्व तक जीवन को वैज्ञानिक दृष्टि से उजागर करेगा।
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इस कोर्स का उद्देश्य शिक्षा की अवधारणा को मजबूत करना है। इसमें विज्ञान, इतिहास, पुरातत्व और आनुवंशिकी शामिल हैं। प्रोफेसर चौबे ने बताया कि कोर्स की संरचना पाषाण युग से लेकर प्राचीन डीएनए तक के रोचक सफर पर आधारित है। छात्रों को पुरातत्व और जंतु विज्ञान के मूल सिद्धांतों से परिचित कराएगी। कोर्स में वरिष्ठ विशेषज्ञों के अतिथि व्याख्याता के तौर पर शामिल किया गया है।