संकट मोचन संगीत समारोह में सितार प्रस्तुत करते पद्मश्री उस्ताद शाहिद परवेज खां
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गंगा जमुनी तहजीब का शहर बनारस यूं ही नहीं कहा जाता है। संकटमोचन संगीत समारोह में संगीत जाति, धर्म और संप्रदाय से ऊपर उठकर कलाकार हाजिरी लगाते हैं। यहां ना तो कोई हिंदू होता है और ना ही मुसलमान, बस संकटमोचन के चरणों में हाजिरी लगाने वाले कलाकार होते हैं।
संकटमोचन संगीत समारोह में मुस्लिम कलाकार भी पूरी श्रद्धा भाव के साथ हाजिरी लगाते हैं। 2006 में भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के भांजे उस्ताद मुमताज खां से शुरू हुआ सिलसिला आज भी अनवरत जारी है।
इसके बाद सारंगी वादक कमला साबरी, सितार वादक उस्ताद निशात खां, उस्ताद मोइनुद्दीन खां जैसे बड़े कलाकारों को अपनी प्रस्तुति देने का अवसर मिला। वर्ष 2014 में पहली बार व 2016 में दूसरी बार पाकिस्तानी गजल गायक गुलाम अली जैसे कलाकारों ने प्रस्तुति दी। 2014 में उस्ताद अमजद अली खां ने सरोद से अपनी प्रस्तुति दी।
99वें संकटमोचन संगीत समारोह मैं इस वर्ष कई मुस्लिम कलाकारों को मौका मिला है। इनमें कोलकाता से शिराज अली खां। इटावा (इमदादखानी) घराने के 8वीं पीढ़ी के उस्ताद शाकिर खान, उस्ताद गुलाम अब्बास खां, पुणे से उस्ताद शाहिद परवेज खान, कोलकाता से उस्ताद मशकूर अली खां, जयपुर से उस्ताद मोइनुद्दीन खां और मोमिन खां व उस्ताद अकरम खां शामिल हो रहे हैं।