विश्वनाथ काॅरिडोर के लिए अधिग्रहित भूमि का स्वामित्व विश्वनाथ मंदिर के पक्ष में घोषित करने और अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी से जमीन की अदला-बदली को चुनौती देते हुए एक याचिका अदालत में दाखिल की गई।
यह याचिका बनारस बार एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री नित्यानंद राय ने सिविल जज सीनियर डिविजन हितेश अग्रवाल की अदालत में दाखिल की है। याचिका पर सरकार की तरफ से विशेष अधिवक्ता राजेश मिश्रा ने मौखिक आपत्ति दर्ज कराई है। फिलहाल, इस प्रकरण में कोई आदेश पारित नहीं हुआ है।
याचिका में कहा गया है कि वादी आस्थावान हिंदू है। आदि विश्वेश्वर मंदिर जो श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के रूप में सार्वजनिक पूजास्थल है, वहां पर होने वाले किसी भी अतिक्रमण को रोकने के लिए वादी जागरूक रहता है। प्लाट नंबर 8276 का स्वयं को मालिक बताते हुए अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा खरीदे गए भवन से अदला-बदली की।
मसाजिद कमेटी ने विश्वनाथ कॉरिडोर बनाने में हुई जल्दबाजी का फायदा उठाते हुए विनिमय यानी अदला-बदली का षड्यंत्र रचा। उत्तर प्रदेश सरकार और मसाजिद कमेटी के बीच 10 जुलाई 2021 को उप निबंधक द्वितीय के यहां अदला-बदली का निबंधन हुआ, वह गलत था।
अदला-बदली विलेख में भवन की चौहद्दी के पूरब, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण में काशी विश्वनाथ मंदिर का उल्लेख है। याचिका में वादी ने प्रार्थना की है कि विनिमय विलेख 10 जुलाई 2021 को शून्य घोषित किया जाए। विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र में आने वाली समस्त आराजी पर स्वामित्व श्री काशी विश्वनाथ मंदिर का घोषित किया जाए।
वादी की तरफ से अधिवक्ता देशरत्न श्रीवास्तव और सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता गौरव सिंह ने अदालत को बताया कि मसाजिद कमेटी अदला-बदली में प्राप्त मकान की प्रकृति बदलना चाहती है। लिहाजा दीवानी प्रक्रिया संहिता की धारा-80 की नोटिस देने की अनिवार्यता से उन्मोचित कर तत्काल वाद दर्ज कर गुण-दोष के आधार पर मुकदमे का निस्तारण किया जाए।