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काशी विश्वनाथ धाम को जमीन देने पर बोले सईद यासीन- जमीन का क्षेत्रफल मायने नहीं रखता, इसके पीछे की भावना महत्वपूर्ण

Sat, 24 Jul 2021 12:06 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

अंजुमन इंतेजामिया कमेटी के सचिव सईद यासीन ने बताया कि जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया दो सालों से चल रही थी। मुस्लिम समाज की राय के बाद आठ जुलाई को जमीन का विनियम किया गया। उन्होंने इसे गंगा जमुनी की तहजीब बताया है।
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अंजुमन इंतेजामिया कमेटी के सचिव सईद यासीन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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ज्ञानवापी मस्जिद पक्ष की ओर से मस्जिद से सटी 17 सौ वर्ग फुट जमीन धाम के निर्माण के लिए दी गई है। बदले में मंदिर प्रशासन ने मुस्लिम समाज को एक हजार वर्ग फुट जमीन बांसफाटक के पास दी है। अंजुमन इंतेजामिया कमेटी के सचिव सईद यासीन ने इसे गंगा जमुनी की तहजीब बताया है। उन्होंने कहा कि उनको भी होश आए जिन्होंने हमें मुकदमों में ढकेल रखा है। वह भी समझें कि इससे कोई फायदा नहीं है क्योंकि मस्जिद अपनी जगह रहनी है और मंदिर अपनी जगह रहना है।

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जमीन हस्तांतरण पर उन्होंने कहा कि जमीन का क्षेत्रफल मायने नहीं रखता, मायने यह रखता है कि इसके पीछे हमारी भावना कैसी है। हमने एक अच्छी पहल के तौर पर यह कदम उठाया है और इसका संदेश समाज में भी जाएगा। बनारस जिस गंगा जमुनी तहजीब के लिए मशहूर है वह और भी मजबूत होगी।

सईद यासीन ने कहा कि यह मसला एक दिन में हल नहीं हुआ है। 1993 में इस जमीन को लीज पर जिला प्रशासन को दिया था कि पुलिस कंट्रोल रूम बना लिया जाए, जिससे कि मंदिर और मस्जिद की हिफाजत हो सके। काशी विश्वनाथ धाम का दायरा भी बढ़ा है तो सुरक्षा का बड़ा इंतजाम किया जा रहा है। वहीं कॉरिडोर में जाने के लिए रास्ता भी तंग पड़ रहा था। दो साल पहले मंदिर प्रशासन ने जमीन के विनिमय करने का प्रस्ताव रखा था।

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मसला वक्फ की प्रॉपर्टी का था। इसलिए हमने लोगों से फतवा मांगा, शहर के मानिंद लोगों की भी राय ली। दोनों बातें हमारे पक्ष में रहीं। धर्मगुरुओं की भी राय ली गई तो उन्होंने भी जमीन विनिमय करने की सलाह दी। दो साल से बात चल रही थे। लगभग पांच महीने पहले सुन्नी वक्फ बोर्ड से भी इसकी अनुमति मिली थी। इसके बाद शासन से मंजूरी आने में समय लग गया। वहां से मंजूरी मिलने के बाद आठ जुलाई को रजिस्टर्ड एग्रीमेंट हो गया। वैसे यह जमीन मस्जिद का हिस्सा नहीं है। यह वक्फ बोर्ड की जमीन है और इसका मस्जिद से कोई ताल्लुक नहीं है। 

बनेगा कॉमर्शियल कांपलेक्स 
श्री काशी विश्वनाथ धाम के लिए अंजुमन इंतेजामिया कमेटी ने 17 सौ स्क्वॉयर फीट जमीन दी है। वहीं बदले में कमेटी को एक हजार स्कवॉयर फीट जमीन बांसफाटक के पास मिली है। सचिव ने बताया कि इस जमीन पर कामर्शियल कांपलेक्स का निर्माण किया जाएगा। लोगों ने हमें मुकदमों में ढकेल रखा है तो आखिर खर्चे भी तो चाहिए। बाकी जो मस्जिद की जमीन है उसके लिए कोर्ट में अपना पक्ष रखते रहेंगे। 
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