एम्बुलेंस कर्मियों ने डीएम को सौंपा ज्ञापन
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102 और 108 एंबुलेंस सेवाओं के ठप होने से गर्भवती महिलाओं और घायलों, मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में बुधवार को पूरे दिन परेशानी उठानी पड़ी। चालकों और टेक्नीशियनाें की हड़ताल से एंबुलेंस के पहिये थम गए। तीन महीने से मानदेय का भुगतान न होने से चालक और टेक्नीशियन नाराज थे।
चिरईगांव ब्लॉक के सामने रिंगरोड के पास एंबुलेंस खड़ी कर धरने पर बैठे इन कर्मचारियों से सीएमओ ने वार्ता की। शाम सात बजे एक महीने का मानदेय खाते में आने के बाद कर्मचारियों ने हड़ताल स्थगित कर दी। इसी के साथ एंबुलेंस सेवाएं बहाल हो गईं।
इससे पहले दिन भर चली हड़ताल के दौरान एंबुलेंस के लिए जिले में सौ से अधिक कॉल आई। जिले में 102 नंबर की 37 और 108 नंबर की 20 एंबुलेंस हैं। गर्भवती महिलाओं को अस्पताल ले जाने के लिए 102 नंबर और सड़क दुघर्टना आदि इमरजेंसी के समय मरीजों को ले आने के लिए 108 नंबर की एंबुलेंस संचालित हैं।
इनके संचालन की जिम्मेदारी जीवीके कंपनी को दी गई है। दो शिफ्ट में करीब 200 कर्मचारी काम करते हैं। दिन भर चली हड़ताल से जहां गर्भवती महिलाओं को अस्पताल ले जाने के लिए निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ा वहीं इमरजेंसी के मरीज और उनके परिजन भी एंबुलेंस सेवा के लिए फोन घनघनाते रहे।
हालांकि शाम को हड़ताल स्थगित होने के बाद एंबुलेंस सेवा बहाल हो गई। जीवीके कंपनी के आरएम धीरज केशरवानी ने बताया कि देर शाम एक महीने का वेतन जारी कर दिया गया है। दो महीने का ही वेेतन बाकी था।