त्रिदेव मंदिर में सजी श्याम प्रभु की आकर्षक झांकी
वाराणसी। दुर्गाकुंड स्थित त्रिदेव मंदिर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर सेवक परिवार ने उत्सव मनाया। रंग-बिरंगे फूलों से श्रीकृष्ण की भव्य झांकी सजाई गई। साथ ही तीनों विग्रह राणी सती, सालासर हनुमान और खाटू श्याम की भी सुंदर झांकी सजाई गई। मंदिर परिसर को गुब्बारों और फूलों से सजाया गया। इस मौके पर भजन संध्या में कलाकारों ने ‘जय कन्हैया लाल की, हाथी घोड़ा पालकी...’, ‘आज खुशियां मनाओ, बधाइयां बांटो, जन्म हुआ कन्हैया का नंदलाल के आंगन में...’ जैसे गीतों से वातावरण को भक्तिमय बना दिया। रात में लीलाधर को पंचामृत से स्नान कराकर नए वस्त्र धारण कराए गए। मक्खन और मिश्री के साथ ही धनिया की पंजीरी और मिठाइयों का भोग लगाया गया। भक्तों ने मलाई का केक काटकर जन्मोत्सव मनाया। सभी ने प्रसाद ग्रहण किया। संस्था के अध्यक्ष भरत सर्राफ, मंत्री राधे गोविंद केजरीवाल ने तीनों विग्रहों की आरती उतारी। संयोजन में मंदिर सेवक परिवार के सभी सदस्य और भक्तगण मौजूद रहे। संवाद
आश्रम में मनाई गई जन्माष्टमी, बच्चों में बांटा प्रसाद
वाराणसी। सामने घाट स्थित अपना घर आश्रम में बुधवार को जन्माष्टमी मनाई गई। आश्रम में रह रही निराश्रित महिलाओं के बच्चों को कान्हा और राधा के रूप में सजाया गया। इस दौरान बच्चों ने विभिन्न प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। देर रात भगवान का जन्म कराया गया। पूजा-पाठ के बाद बच्चों में प्रसाद बांटा गया। इस दौरान पूरे परिसर में सजावट की गई थी। संवाद
श्याम मंदिर में कान्हा का सजा उत्सव
वाराणसी। लक्सा स्थित श्री श्याम मंदिर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर नटवर नागर का जन्मोत्सव मनाया गया। यह आयोजन श्री श्याम मंडल की ओर से किया गया। मंदिर में आकर्षक सजावट और झांकी सजाई गई। प्रभु को मक्खन, मिश्री, धनिया की पंजीरी, चिनिया बादाम की बर्फी, गरी और रामदाना की बर्फी आदि का भोग लगाया गया। संस्था ने केक काटकर प्रभु का जन्मोत्सव मनाया। मंदिर के पुजारी संजय हजारी ने प्रभु की आरती उतारी। भजन संध्या में कलाकारों ने भक्तिमय गीतों से श्याम दरबार में हाजिरी लगाई। उन्होंने ‘हारे, हारे, हारे, हारे, तू है सहारा...’ और ‘यशोदा मैया से पूछे नंदलाला, राधा क्यों गोरी, कृष्ण क्यों काला...’ आदि भजन पेश किए। संवाद
लाट भैरव भजन मंडली में जन्माष्टमी पर गूंजे सोहर और बधाई गीत
वाराणसी। लाट भैरव भजन मंडली ने जन्माष्टमी पर नंदलाला की भव्य झांकी सजाई। तेलियाना स्थित सभागार को झालरों और फूल-पत्तियों से सजाया गया। आंगन में अनेक खिलौनों के बीच भगवान योगेश्वर का बाल स्वरूप अद्भुत लग रहा था। भगवान को माखन-मिश्री सहित अनेक प्रकार के भोग अर्पित किए गए। गणेश वंदना के साथ भजनों का क्रम शुरू हुआ। ‘भादो क महीनवां भइले देवकी के ललनवां हो, मनवां हरषित भइले ना...’, ‘जन्मे हैं कृष्ण कन्हैया, बिरज में बाजै बधाइयां हो...’ जैसे सोहर और बधाई गीतों से सभागार झूम उठा। आयोजन में केवल कुशवाहा, महंत रामदास, विष्णुदास, गोविंद बाबा और संतुष्ट सोनकर समेत बड़ी संख्या में भक्तजन उपस्थित रहे। संवाद
मणि मंदिर में कान्हा को पंचामृत स्नान कर लगा 101 क्विंटल हलवा का भोग
वाराणसी। कान्हा के जन्म पर श्रीमणि मंदिर धर्मसंघ, दुर्गाकुंड में दर्शन-पूजन के लिए भीड़ रही। मंदिर में लीलाधर की झांकियां सजाई गईं। मंदिर कोलकाता के कारीगरों, कामिनी और अशोक की पत्तियों तथा गुलाब, गेंदे और रजनीगंधा के फूलों से सजाया गया था। धर्मसंघ पीठाधीश्वर स्वामी शंकरदेव चैतन्य ब्रह्मचारी महाराज के सानिध्य में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया गया। पंचामृत स्नान, चंदन से गंधोदक स्नान, नारियल के पानी से गर्भोदक स्नान के बाद भस्मोदक और पुष्पोदक स्नान हुआ। संवाद
दंडी संन्यासियों ने किया श्रीमद्भागवत व रास पंचाध्यायी का पाठ
वाराणसी। पूर्वाम्नाय श्री दक्षिणामूर्ति मठ, अस्सी में भी श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया गया। दंडी संन्यासी स्वामी वन वैभवारण्य सरस्वती के सानिध्य में दक्षिणामूर्ति का पूजन-अर्चन और अभिषेक हुआ। लड्डू गोपाल को नए आकर्षक वस्त्रों से सुसज्जित कर उनकी पूजा हुई। भक्तों ने लड्डू गोपाल को आकर्षक झूले में बैठाकर भक्ति भाव से झुलाया। श्रीमद्भागवत महापुराण के दसवें स्कंध के प्रथम पांच अध्यायों एवं रास पंचाध्यायी के 31वें अध्याय का पाठ हुआ। आरती के बाद भंडारे में भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। संवाद