तीन साइकल महिला की हुई कीमोथेरेपी
स्त्री रोग विभाग की डॉ. ममता के अनुसार जिस महिला की डिलीवरी से पहले आंकोलॉजी विभाग में सर्जरी कर सिस्ट निकाला गया। उसकी कैंसर की पुष्टि होने के बाद उसको तीन साइकल कीमोथेरेपी भी देनी पड़ी।
इसके बाद जब महिला को कैंसर की जानकारी दी गई तो पहले तो परिजन घबरा गए, लेकिन महिला ने कैंसर के गम को पीछे छोड़ अपनी डिलीवरी करवाने की इच्छा जाहिर की। साथ ही डॉक्टरों से सुरक्षित प्रसव करवाने को कहा। इसके बाद उसका प्रसव करवाया गया। डिलीवरी में स्त्री रोग विभाग से डॉ. दीप्ति, डॉ. स्नेहल के साथ ही एनीस्थीसिया विभाग की टीम का भी सहयोग रहा।
नाल में थी गांठ, डिलीवरी थी बड़ी चुनौती
डॉ. ममता ने बताया कि डिलीवरी से पहले जब जांच हुई तो पता चला कि बच्चे के गले में नाल 6 बार लिपटा है और उसमें गांठ भी थी। पहले मां को कैंसर, फिर उसके होने वाले बच्चे के गले में 6 बार नाल लिपटने और उसमें भी गांठ। जिसको चिकित्सकीय भाषा में टू नॉट बोला जाता है। ऐसी परिस्थिति में सुरक्षित प्रसव करवाना बड़ी चुनौती थी।
ऐसा इसलिए कि इस तरह के केस में नवजात का जान जाने का खतरा रहता है। इसके बाद एमसीएच विंग के ऑपरेशन थिएटर में सर्जरी की गई। महिला ने बच्चे को जन्म दिया। बच्चे का वजन जनम के समय केवल 1.700 किलोग्राम रहा। इस वजह से महिला को एनआईसीयू में रखना पड़ा। महिला को डिस्चार्ज कर दिया गया है। समय-समय पर जांच करवाने आती रहेगी।
बोले अधिकारी
आईएमएस बीएचयू में डॉ. ममता के निर्देशन में कैंसर ग्रसित महिला का जिस तरह से सुरक्षित प्रसव करवाया गया, यह संस्थान के लिए बड़ी उपलब्धि और गौरव की बात है। इसके लिए पूरी टीम को बधाई। आईएमएस में गर्भवती महिलाओं को बेहतर सुविधाएं मुहैया करवाने के उद्देश्य से एमसीएच विंग में जांच, इलाज की सुविधाओं में इजाफा किया जाएगा, जिससे कि मरीजों को लाभ मिल सके। - प्रो.एसएन संखवार, निदेशक, आईएमएस बीएचयू