सोमवार को एमएस प्रो. केके गुप्ता, डिप्टी एमएस प्रो. सौरभ सिंह ने आगे से ऐसी लापरवाही न हो, इसके लिए बैठक कर सुविधाओं को और पुख्ता करने के निर्देश दिए। एमएस ने बताया कि केवल बाल रोग विभाग ही नहीं बल्कि अस्पताल में कही भी अगर बेड है तो बिना जानकारी के बेड न होने की बात कहकर किसी मरीज को वापस न किया जाय, इस तरह का निर्देश पहले ही दिया जा चुका है।
मामले में आईएमएस बीएचयू के निदेशक प्रो. बीआर मित्तल ने कहा कि एनआईसीयू में बेड खाली होने के बाद भी रविवार को इमरजेंसी में किसने और क्यों बच्चे को भर्ती नहीं किया। इस मामले में अस्पताल के एमएस से रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट आने के बाद उसके आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
बीएचयू बाल रोग विभाग के अध्यक्ष प्रो. राजनीति प्रसाद का कहना है कि एनआईसीयू में छह वेंटिलेटर वाले बेड भी हैं, और सब खाली हैं। जिस तरह की लापरवाही हुई है, उससे विभाग की छवि धूमिल हुई है। यह बहुत बड़ी लापरवाही है। इसके लिए जो भी जिम्मेदार होगा, उसके खिलाफ ठोस कार्रवाई होगी।
परिजन चंद्रभूषण यादव के अनुसार बच्चे की सेहत में भी सुधार हो रहा है। बताया कि जैसा उनके साथ हुआ, अब किसी और के साथ न हो, इसके लिए व्यवस्था में सुधार कराया जाना जरूरी है।