स्कूल खुलने के बाद छात्रों का तनाव कम करने के लिए प्रार्थना सभा में कई तरह के प्रयोग किए जाते रहे। योग, संगीत के साथ प्रार्थना और अन्य गतिविधियों को शामिल किया गया। विद्यालय के महत्वपूर्ण आयोजनों में भी ऑनलाइन और ऑफलाइन में सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखा गया। संक्रमण काल में ऑनलाइन शिक्षण भी जारी रहा।
बच्चों ने कोरोना काल में खुद को किया मजबूत
डॉ. रामाश्रय बताते हैं कि उन्होंने शिक्षकों के साथ छात्रों की परिचर्चा करा कर यह जानने का प्रयास किया कि कोरोना से लगातार छुट्टियों और समाज में घटनाओं से बच्चे अवसाद में तो नहीं आए, लेकिन जानकर आश्चर्य हुआ कि बच्चे कोरोना से बचने के उपाय न सिर्फ अपनाते थे बल्कि अन्य ग्रामीणों को भी प्रेरित करते थे।
बच्चों ने बताया कि वह बड़े होकर वैज्ञानिक, चिकित्सक बन कर कोरोना की भयावहता को दूर करेंगे। इससे स्पष्ट हुआ कि बच्चे कोरोना से डरे नहीं बल्कि उस चुनौती का सामना करने के लिए आपदा में अवसर ढूंढते रहे।
राजकीय इंटर कॉलेज में कृषि विभाग ने अपने प्रायोगिक कार्य को धरातल पर उतारा। इससे छात्रों में पढ़ाई के साथ प्रयोग में भी रुचि जगी। छात्रों ने न सिर्फ विभिन्न प्रकार की सब्जियों को परिसर में लगाया बल्कि उससे अधिक ऑर्गेनिक उत्पादन भी प्राप्त किया। कृषि शिक्षक राजेश कुमार राय के निर्देशन में बच्चों ने तरह-तरह की सब्जियां उगाईं और उसके उत्पादन और प्रायोगिक विधि को फील्ड में सीखा।