स्थानीय लोगों के अनुसार नीचे से पानी की पाइप भी गुजरी है। संभव है, उसमें समस्या होने या गैस अथवा पेट्रोल की पाइप की वजह से भी यह समस्या हो सकती है। हालांकि, पुरातात्विक महत्व के स्थल के पास यह भूकंपीय स्थिति होना भी किसी खतरे से कम नहीं है। भूकंपीय स्थिति की वजह से ऐतिहासिक धरोहरों को भी काफी क्षति पहुंचने का अंदेशा है। जबकि पुरातत्व विभाग की ओर से इस हालात की न तो सोमवार को जानकारी ली गई और न ही इस बारे में विभागीय स्तर पर चर्चा हुई कि आखिर सारनाथ की धरती के नीचे चल क्या रहा है।
एक हफ्ते से हो रहा कंपन
जापानी मंदिर मोड़ के सामने पिछले एक हफ्ते से भूखंड हिलने का सिलसिला कल जाकर लोगों के सामने स्पष्ट हुआ। बीते सोमवार को काफी तेजी से जब दुकानदारों के शटर हिलने लगे तो लोगों को लगा कि पिछले दिनों से हम सब जो देख व महसूस कर रहे थे, वह सच में हो रहा है।
मंगलवार को भी सुबह साढ़े 11 बजे से 1:30 बजे तक कंपन को महसूस किया गया। कंपन के कारण क्षेत्र में लोगों में भय का माहौल बना हुआ है, तो वहीं, बड़े कौतूहल और चर्चाएं तेज हो गई हैं। आज कंपन का दायरा मुख्य बिंदु से लगभग 100 मीटर दूर तक महसूस किया गया। मुख्य केंद्र एक ट्रैवल एजेंसी का कार्यालय बना हुआ है, जहां पर सबसे तेज कंपन को महसूस किया गया था।
विद्यापीठ के पूर्व कुलपति एवं भू वैज्ञानिक प्रो. पृथ्वीश नाग ने कहा कि काफी कम परिक्षेत्र में भूमि का कंपन होने की मुख्य वजह आसपास के क्षेत्र से कोई मोटी पाइप गुजरी हो और उसके लिए मशीन चल रहा हो। इसकी वजह से ही कंपन आ रहा होगा। कहाकि हो सकता है कि आस-पास कोई बड़ी मशीन चल रहा हो। मौके पर जाकर ही स्पष्ट होगा कि भूमि कंपन के पीछे कारण क्या है।
भू एवं मौसम विज्ञानियों का कहना है कि कंपन वाले इलाके के दायरे में कोई पुरातात्विक अवशेष भी हो सकता है। हालांकि बिना जांच किए प्रमाणिक तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता। विज्ञानियों का कहना है कि इस क्षेत्र में टेक्टोनिक प्लेट जैसी कोई बात नहीं है। संभव है इस खास क्षेत्र में धरती के नीचे गैस बन रही हो और उसे निकलने का स्थान न मिल रहा हो।