25 डिग्री से ज्यादा तापमान में पनपते हैं शैवाल
नदी विज्ञानी प्रो. बीडी त्रिपाठी के अनुसार जब जल के अंदर का तापमान 25 डिग्री सेल्सियस से अधिक होता है तब शैवाल के पनपने के अनुकूल वातावरण बन जाता है। बीते सप्ताह प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जांच में रामनगर की ओर गंगा जल के भीतर का तापमान 35 डिग्री के आसपास मिला था। प्रो. त्रिपाठी ने कहा कि जल्द ही इस समस्या का स्थायी हल नहीं खोजा गया तो गंगा का इकोसिस्टम प्रभावित होगा और जलचरों के जीवन पर संकट खड़ा हो जाएगा। सबसे पहले छोटे आकार वाले जीवों के जीवन पर संकट होगा।
गैर जरूरी जीवों की संख्या में होती है अप्रत्याशित वृद्धि
बीएचयू में इंस्टीट्यूट आफ एनवायरमेंट एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट के वैज्ञानिक डॉ. कृपाराम ने बताया कि जल में युट्रोफिकेशन प्रक्रिया होने से एल्गी ब्लूम (हरे शैवाल) बनते हैं। ऐसा तब होता है जब जल में न्यूट्रिएंट काफ ी बढ़ जाते हैं। इस कारण गैर जरूरी स्वस्थ जीवों की संख्या में अप्रत्याशित रूप से वृद्धि होती है। ऐसे में शैवालों को प्रकाश संश्लेषण करने का सबसे उपयुक्त वातावरण मिलता है। तब पानी में ऑक्सीजन कम होने लगता है, जिससे बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) सबसे पहले प्रभावित होती है।