इसके अलावा सोनभद्र में पुरुषों की दर 24.1 से बढ़कर 44.2 प्रतिशत पहुंच गई, यानी 20.1 प्रतिशत अंक की वृद्धि हुई। बलिया में 9.9 से बढ़कर 20.4 प्रतिशत होने के साथ 10.5 प्रतिशत अंक का इजाफा हुआ।
वहीं, वाराणसी में पुरुषों की शराब सेवन दर 13.4 से बढ़कर 22.8 प्रतिशत, आजमगढ़ में 14.7 से बढ़कर 24 प्रतिशत और मिर्जापुर में 14 से बढ़कर 22 प्रतिशत हो गई। चंदौली में 16.9 से बढ़कर 24.6 प्रतिशत, मऊ में 13.6 से बढ़कर 20.5 प्रतिशत और भदोही में 7.7 से बढ़कर 14.2 प्रतिशत पहुंच गई। जौनपुर में सबसे कम वृद्धि जरूर दर्ज हुई, लेकिन वहां भी दर 13.6 से बढ़कर 18.3 प्रतिशत हो गई।
सोनभद्र की महिलाओं में बढ़ा शराब सेवन, जौनपुर में आई कमी
महिलाओं के शराब सेवन के आंकड़ों में सोनभद्र की स्थिति सबसे ज्यादा ध्यान खींचती है। वहां महिलाओं में शराब सेवन की दर 0.6 प्रतिशत से बढ़कर 4.7 प्रतिशत हो गई है। यह दस जिलों में सबसे बड़ी बढ़ोतरी है।
दूसरी ओर, जौनपुर में महिलाओं की दर 0.6 से घटकर 0.2 प्रतिशत हो गई। गाजीपुर उन तीन जिलों में शामिल है, जहां महिलाओं में शराब सेवन की दर बढ़ी है। यहां 0.2 से बढ़कर 0.4 प्रतिशत होने के साथ यह दोगुनी हो गई। मिर्जापुर में भी दर 0.1 से बढ़कर 0.3 प्रतिशत पहुंची है। लेकिन वाराणसी में 0.4 से 0.2, चंदौली में 0.4 से 0.3 और आजमगढ़ में 0.3 से घटकर 0.1 प्रतिशत रह गई। भदोही में 0.1, मऊ में 0.4 और बलिया में 0.5 प्रतिशत की दर पहले जैसी ही बनी हुई है।
स्कूल की उम्र से ही बच्चों को जागरूक करना जरूरी
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील कुमार पांडेय ने नशे की प्रवृत्ति बढ़ने पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इसका मुख्य कारण शिक्षा की कमी और जानकारी का अभाव है। इसलिए बच्चों में स्कूल जाने की उम्र से ही, विशेषकर नौवीं और दसवीं कक्षा में, नशामुक्ति के प्रति जागरूकता बढ़ाना जरूरी है।
बताया कि सामाजिक कल्याण और स्वास्थ्य विभाग इस दिशा में नोडल विभाग के रूप में काम कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की मेंटल हेल्थ क्लीनिक के अंतर्गत ड्रग डी-एडिक्शन यूनिट संचालित है। यहां मरीजों की काउंसलिंग कर उन्हें नशे की लत से छुटकारा दिलाने और सब्स्टीट्यूट थेरेपी देने का प्रयास किया जाता है।
उन्होंने कहा कि समाज और प्रशासन को मिलकर स्कूलों और गांवों में विशेष जागरूकता शिविर लगाने होंगे। शुरुआती स्तर पर ही प्रयास करके इस समस्या पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। नशा उन्मूलन को लेकर लगातार नशा विरोधी और जनजागरूकता अभियान चलाए जाते हैं। इसके बावजूद सर्वे में आंकड़े बढ़े हुए मिले हैं तो इससे समाज में नशे के प्रति लोगों का रुझान बढ़ने का संकेत मिलता है। - राजेश कुमार त्रिपाठी,जिला आबकारी अधिकारी एवं मद्य निषेध अधिकारी।