आजमगढ़ के नत्थूपुर में बुधवार को कारगिल शहीद रामसमुझ यादव की प्रतिमा के अनावरण के लिए पहुंचे पूर्व सीएम एवं सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव केंद्र और प्रदेश सरकार पर जमकर बरसे।
कहा कि भाजपा ने यश भारती सम्मान बंदकर खिलाड़ियों और सैनिकों का अपमान किया है। उनकी पेंशन बंद कर दी। साजिश के तहत पूर्वांचल एक्सप्रेस वे का काम रोका गया। योजनाओं से समाजवादी नाम हटाने पर भी आपत्ति जतायी।
कहा कि कहा कि जो बोओगे वही काटोगे। अगर हम गोरखपुर में नाम बदलेंगे तो बुरा मत मानना। शहीद के मूर्ति अनावरण के बाद उन्होंने 32 शहीदों के परिजनों को सम्मानित किया।
जनसभा में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि हमें गर्व है अपने देश की फौज पर जो लगातार सीमा की रक्षा कर रही है। इसके बाद उन्होंने केंद्र और प्रदेश सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि विकास उसी देश का होता है जहां अच्छी सड़कें, अच्छी शिक्षा और अस्पतालों की सुविधा हो।
हमने 23 महीने में लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस वे बना दिया। पूर्वांचल एक्सप्रेस वे के लिए 60 फीसदी जमीन अधिग्रहीत की जा चुकी थी। समय नहीं मिला वरना हम इसे भी बना लेते।
भाजपा ने सत्ता में आने के बाद इसके लिए बजट ही जारी नहीं किया। उन्होंने कहा कि नीति आयोग से बनवाएंगे। अब वहां से पैसा लाकर बनवाएं। दोनों जगह उनकी सरकार है।
पूर्व सीएम अखिलेश
- फोटो : अमर उजाला
पूर्व सीएम अखिलेश ने कहा कि एक्सप्रेस वे बन जाता को पूर्वांचल की गरीबी और पिछड़ापन दूर होता। हम सत्ता में आए तो सबसे पहले इसे बनवाएंगे। हमारे कार्यों पर अंगुली उठाई जा रही है और खुद झाड़ू लगा रहे हैं।
सरकार कहती है कि यश भारती हमने अपने लोगों को दिया। नेताजी ने इसे शुरू किया था। इसे ध्यानचंद के बेटे को दिया। सैनिकों को दिया। कलाकारों को दिया।
अब प्रदेश सरकार सैफई स्टेडियम का नाम बदल कर तो मेजर ध्यानचंद के नाम पर कर रही है, वहीं उन्हीं के बेटे की यश भारती पेंशन रोक दी। ये खिलाड़ियों और सैनिकों का अपमान है। समाजवादी पेंशन भी रोक दी। गरीबों का केरोसिन बंद कर दिया।
अपराध रोकने के लिए यूपी-100 योजना शुरू की थी। अब सीएम ने बनारस ने कहा कि इसे भी बंद कर देंगे। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार रोकिए नहीं तो 2019 में जनता आपको ठीक कर देगी।
अखिलेश ने कहा कि गोरखपुर की घटना जो बच्चे मरे वो पिछड़े और मुस्लिम थे। हमारी सरकार मदद करती थी, तो बोलते थे की फेवर करते हैं। जिन बच्चों ती मौत हुई वो आगे जाकर डॉक्टर, इंजीनियर बनते। सरकार ने मदद नहीं की, सिर्फ बोले ऐक्शन लिया जाएगा।
भीड़ ने तोड़ डाली बैरिकेडिंग और कुर्सियां,
कार्यक्रम में महिलाओं को झेलनी पड़ी परेशानी
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आयोजकों की ओर से शहीद मेला कार्यक्रम को लेकर काफी पहले से तैयारियां की जा रही थी। लेकिन कार्यक्रम में काफी दुर्व्यवस्था दिखीं। भीड़ के दबाव से कई स्थानों पर बैरिकेडिंग टूट गया । सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं को उठानी पड़ी।
हालांकि उनके लिए अलग से व्यवस्था की गई थी लेकिन वहां तक भी लोग घुस गए थे। पूरे पंडाल में पुलिस का कहीं पता नहीं था। पुलिस और प्रशासन हेलीपैड से लेकर मंच तक पूर्व मुख्यमंत्री की सुरक्षा में लगा रहा।
शहादत दिवस कार्यक्रम पर पूर्व मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में आने वाली भीड़ की संभावना को देखते हुए आयोजकों ने पंडाल में 20 हजार कुर्सियां लगवाईं थी। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया पंडाल छोटा पड़ता गया।
कार्यक्रम में शामिल होने के लिए जौनपुर, बलिया, मऊ और अंबेडकर नगर आदि से भी समर्थक पहुंचे थे। हर कोई मंच तक पहुंचना चाहता था। लोगों को संभालने के लिए पंडाल में न तो पुलिस की व्यवस्था थी और ना ही सपा का कोई नेता या कार्यकर्ता ही था।
परिणाम यह हुआ कि पंडाल में की गई बैरिकेडिंग धराशाई हो गई। पंडाल में लोग एक दूसरे के ऊपर लदे हुए थे। सबसे बुरी हालत कार्यक्रम में शरीक होने पहुंची महिलाओं की थी।
हालांकि उनके लिए अलग से बैठने के लिए जगह बनाई गई थी। लेकिन लोग महिलाओं के बैठने के लिए बनाई गई जगह पर भी घुसे हुए थे। वहीं पुलिस प्रशासन को आम लोगों की कोई फिक्र नहीं थी।