सपा के गढ़ कहे जाने वाले आजमगढ़ से पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने बुधवार को बड़ी चेतावनी दी है। अखिलेश यादव यहां शहीद मेला में शामिल होने के लिए आए थे। जिले के नत्थुपुर में आयोजित शहीद मेला में उन्होंने कारगिल शहीद रामसमुझ यादव की प्रतिमा की अनावरण किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव ने भाजपा और योगी सरकार पर जमकर हमला बोला। सपा सरकार के समय चलाई गई योजनाओं को बंद करने एवं उनमें से समाजवादी नाम हटाने पर योगी सरकार को घेरते हए कहा कि जो बोओगे वही काटोगे।
अखिलेश यादव ने कहा कि सपा की सरकार बनने पर हम गोरखपुर का नाम बदलेंगे तो बुरा मत मानना। अखिलेश ने कहा कि साजिश के तहत भाजपा की सरकार काम कर रही है। गरीबों का केरोसिन बंद कर दिया। हमारी तमाम कल्याणकारी योजनाएं बंद कर दीं।
हमारे कार्यों पर अंगुली उठाई जा रही है और खुद झाड़ू लगा रहे हैं। उन्होंने गोरखपुर के अस्पताल में हुई मौतों का जिक्र करते हुए कहा कि जो बच्चे मरे वो पिछड़े और मुस्लिम थे।
हमारी सरकार मदद करती थी, तो बोलते थे कि फेवर करते हैं। जिन बच्चों की मौत हुई वो आगे जाकर डॉक्टर, इंजीनियर बनते। सरकार ने मदद नहीं की, सिर्फ बोले ऐक्शन लिया जाएगा। प्रदेश के बहुत से हिस्से बाढ़ से पीड़ित हैं, सरकार ने उनकी मदद उस पैमाने पर नहीं की।
अखिलेश को सुनने के लिए उम्मीद से ज्यादा जुटी भीड़
आजमगढ़ में अखिलेश को सुनने के लिए लगा पंडाल पड़ा छोटा
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शहीद दिवस कार्यक्रम पर पूर्व मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में आने वाली भीड़ की संभावना को देखते हुए आयोजकों ने पंडाल में 20 हजार कुर्सियां लगवाईं थी। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया पंडाल छोटा पड़ता गया।
कार्यक्रम में शामिल होने के लिए जौनपुर, बलिया, मऊ और अंबेडकर नगर आदि से भी समर्थक पहुंचे थे। हर कोई मंच तक पहुंचना चाहता था। लोगों को संभालने के लिए पंडाल में न तो पुलिस की व्यवस्था थी और ना ही सपा का कोई नेता या कार्यकर्ता ही था।
परिणाम यह हुआ कि पंडाल में की गई बैरिकेडिंग धराशाई हो गई। पंडाल में लोग एक दूसरे के ऊपर लदे हुए थे। सबसे बुरी हालत कार्यक्रम में शरीक होने पहुंची महिलाओं की थी।
यश भारती पुरस्कार बंद करने पर भी घेरा
आजमगढ़ में अखिलेश यादव
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आजमगढ़ पहुंचे अखिलेश यादव पूरे रौब में दिखे। उन्होंने कहा कि सरकार कहती है कि यश भारती हमने अपने लोगों को दिया। नेताजी ने इसे शुरू किया था। इसे ध्यानचंद के बेटे को दिया। सैनिकों को दिया। कलाकारों को दिया। अब प्रदेश सरकार सैफई स्टेडियम का नाम बदल कर तो मेजर ध्यानचंद के नाम पर कर रही है, वहीं उन्हीं के बेटे की यश भारती पेंशन रोक दी। कहा कि भाजपा ने यश भारती सम्मान बंदकर खिलाड़ियों और सैनिकों का अपमान किया है।