दीपावली में कम हुई आतिशबाजी के कारण पिछले साल की अपेक्षा इस बार वायु प्रदूषण कम रहा। हालांकि, मानक के अनुसार 10 गुना अधिक वायु प्रदूषण हुआ जबकि बीते साल 20 गुना अधिक प्रदूषण था। वहीं, शहर में सबसे अधिक प्रदूषित क्षेत्र नई सड़क और सबसे कम काशी रेलवे स्टेशन रहा। गौरतलब है कि बीते साल सोनारपुरा सबसे ज्यादा प्रदूषित क्षेत्र था जहां की स्थिति इस बार सुधरी नजर आई।
केयर 4 एयर संस्था की ओर से शुक्रवार को शहर के 17 स्थान पर वायु प्रदूषण का स्तर मापा गया। मुख्य अभियानकर्ता एकता शेखर ने बताया कि पटाखों से पैदा हुए प्रदूषण की जांच में मुख्य रूप से पीएम 10 (रेस्पायरेबल पर्टिकुलेट मैटर) और पीएम 2.5 को मापा गया। नई सड़क पर पी एम 10 की मात्रा 338 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर पायी गयी जबकि पी एम 2.5 की मात्रा 253 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रही।
विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी प्रदूषण सूचकांक के अनुसार प्रदूषण के इन कणों की हवा में अधिकतम मात्रा 25 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर होनी चाहिए। नई सड़क के बाद मैदागिन दूसरे स्थान पर प्रदूषित क्षेत्र रहा।
इसी तरह तीसरे स्थान पर आशापुर, चौथे स्थान पर लंका, पांचवें स्थान पर चौक थाना, छठे स्थान पर महमूरगंज, सातवें स्थान कैंट रेलवे स्टेशन व पांडेयपुर, आठवें स्थान पर डीएलडब्ल्यू व मच्छोदरी, नौवें स्थान पर गोदौलिया, दसवें स्थान पर कचहरी, ग्यारहवें स्थान पर सोनारपुरा, बारहवें स्थान पर इंग्लिशिया लाइन, तेरहवें स्थान पर सारनाथ, चौदहवें स्थान पर रवींद्रपुरी स्थित पीएमओ और आखिरी स्थान पर काशी रेलवे स्टेशन रहा।
उधर, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी घनश्याम ने बताया कि प्रशासन के सहयोग से उन्हीं पटाखा विक्रेताओं को लाइसेंस जारी किया गया था जिनके पास कम प्रदूषण वाले पटाखे थे। ज्यादा प्रदूषण वाले पटाखों की बिक्री पर रोक लगाई गई थी। बीते साल की अपेक्षा आमजन ने भी इस बार आतिशबाजी कम की है। इस वजह से वायु प्रदूषण की स्थिति सुधरी है।