105 वर्ष के बीएचयू ने जापान के क्योटो स्थित 350 साल पुराने ओटानी विश्वविद्यालय के साथ अध्ययन और शोध के लिए समझौता किया है। इससे काशी और क्योटो के बीच अब एक एकेडमिक संबंध भी बन गया। शुक्रवार को बीएचयू से कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी के साथ कला संकाय के 20 से ज्यादा प्रोफेसर और ओटानी विवि से डॉ. शोभा रानी दास सहित जापान के कुल 40 प्रोफेसरों और शोधार्थियों का दल मौजूद था। सभी जापानी डेलीगेट्स ने गुलाबी साफा बांधे कला संकाय के प्रेमचंद सभागार में बैठकर कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी को सुना।
कुलपति प्रो. चतुर्वेदी ने उनसे कहा कि यह कोई प्रतीकात्मक यात्रा नहीं, बल्कि एक सार्थक पहल है। इसमें सांस्कृतिक और शैक्षणिक आदान-प्रदान की संभावना समाई है। मेजबान होने के नाते यह हमारे विद्यार्थियों, अध्यापकों और संकाय की सामूहिक जिम्मेदारी ज्यादा है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि यह संवाद केवल औपचारिकता न रह जाए, बल्कि ज्ञान, दृष्टिकोण और सहयोग का वास्तविक बीज बन जाए, जिसे हम मिलकर सींचें और एक मजबूत वृक्ष के रूप में विकसित करें। बीएचयू एक वैश्विक विश्वविद्यालय है। इसे बनाए रखने के लिए दुनियाभर के प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ शैक्षणिक आदान प्रदान और सहयोग करना जरूरी है।
उन्होंने आगे कहा कि विद्यार्थियों और शिक्षकों के अकादमिक संवाद और भ्रमण कार्यक्रम काफी मददगार होंगे। ये समझौता कार्यक्रम बीएचयू और ओटानी के पालि एवं बौद्ध अध्ययन विभाग और अंतरराष्ट्रीय केंद्र की ओर से कराया गया। बीएचयू में पालि एवं बौद्ध अध्ययन के विभागाध्यक्ष डॉ. अरुण कुमार यादव ने कहा कि हम श्रीलंका और ताइवान समेत विश्व के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के बौद्ध विभागों के साथ अकादमिक आदान-प्रदान करेंगे।