गर्भगृह की वाह्य दीवारों पर सोना मढ़ने के लिए तांबे का सांचा तैयार कर बांस-बल्लियां गाड़ दी गई हैं। बताया जा रहा है कि पहले तांबे का सांचा तैयार होगा, फिर अगले चरण में तांबे के सांचे के अनुसार सोना मढ़ा जाएगा। यहां बता दें कि 1780 में इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने मंदिर का निर्माण कराया था।
शाह शुजाउद्दौला से युद्ध में जीते गए सोने के एक तिहाई भाग को पंजाब के महाराजा रणजीत सिंह ने बाबा के दरबार में अर्पित किया था। उसी समय काशी विश्वनाथ के दो शिखर स्वर्ण मंडित किए गए थे।
दो शिखरों पर चढ़ाया जाएगा सोना
काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में स्थित पहले से स्वर्ण मंडित दो शिखर की दीवारों पर सोने की परत चढ़ाई जाएगी। इसके लिए 10 सदस्यीय टीम दो चरणों में काम कर रही है। इस दौरान भक्तों को किसी तरह की असुविधा नहीं हो, इसके लिए गर्भगृह के द्वार के पास सबसे अंतिम में काम कराया जाएगा।
काशी विश्वनाथ मंदिर की गर्भगृह और बाहरी दीवारों पर कुल 60 किलो सोना लगाया जाएगा। सूत्रों की माने तो पीएम नरेंद्र मोदी की मां हीराबेन के वजन के बराबर ही मंदिर परिसर में सोना दान किया गया है। स्वर्ण आभा से दमक रहे गर्भगृह की पहली तस्वीर पीएम मोदी के काशी दौरे के दौरान ही सामने आई थी। गर्भगृह में 37 किलोग्राम और बाहरी दीवारों पर 23 किलोग्राम सोना लगेगा।
मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल ने कहा कि स्वर्ण मंडित शिखर की दीवारों को पर सोना चढ़ाने का काम शुरू किया गया है। इसमें 23 किलोग्राम सोना लगाया जाएगा। जमीन से आठ फीट की ऊंचाई के बाद दीवारों को स्वर्णमंडित करने की योजना है। इस काम को जल्द से जल्द पूरा करा लिया जाएगा।