श्रीकृष्ण जन्माष्टमी इस बार पांच साल बाद गृहस्थ और वैष्णवजन एक ही दिन चार सितंबर को मनाएंगे। उदया तिथि और रोहिणी नक्षत्र की अष्टमी एक ही दिन होने से ऐसा दुर्लभ खगोलीय संयोग बना है। ऐसा संयोग 2021 में बना था। इसके चलते जयंती जन्माष्टमी योग बन रहा है। मंदिरों, मठों, आश्रमों और घरों में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव मनाया जाएगा। रात में 12 बजे प्रभु के जन्म के साथ ही उत्सव शुरू हो जाएगा। इस बार प्रभु के जन्मोत्सव पर व्रत रखकर पूजा करने से पुण्य, सिद्धियों की प्राप्ति और मनोकामनाएं पूर्ण होंगी। चंद्रोदय का समय रात 11:09 बजे होंगे।
गृहस्थ (स्मार्त) उदया तिथि (सूर्योदय के समय जो तिथि हो) और अष्टमी के मानक नियमों के अनुसार व्रत रखते हैं। वैष्णव संप्रदाय (संत और इस्कॉन अनुयायी) निशीथ काल (मध्यरात्रि) में अष्टमी और रोहिणी नक्षत्र के मिलन और पारण के नियमों का पालन करते हैं। लेकिन, खगोलीय संयोग कुछ वर्षों, दशकों बाद बनता है, जब रोहिणी नक्षत्र और उदया तिथि की अष्टमी एक ही दिन पड़ेगी। इसके चलते गृहस्थ और वैष्णव एक ही दिन जन्माष्टमी मनाते हैं।