जीउत अब इस उम्मीद में था कि जल्द ही पत्नी की आखिरी अमानत उसके पास होगी। लेकिन बैंक वालों का मन अभी उसे दौड़ाने से भरा नहीं था। बीच में लॉकडाउन ने भी जीउत की उम्मीदों पर पानी फेरा। बैंक खुलने लगे तो उसने चक्कर लगाना फिर शुरू किया।
बृहस्पतिवार को बैंक से बाहर आकर उदास बैठे जीउत पर जब अमर उजाला रिपोर्टर की नजर पड़ी तो पूछताछ में उसने सारी कहानी बयां की। उसने बताया कि साहब ने कहा है लाकडाउन खत्म होने के बाद आना तब पैसे मिलेंगे। रिपोर्टर उसे लेकर बैंक के अंदर गया और अकाउंटेंट नंदकिशोर से बात की तब भी उसने पैसे देने से मना कर दिया।
नंदकिशोर का कहना था कि अब वह लॉकडाउन के बाद जीउत के घर जाएगा और पता करेगा की असलियत में पत्नी की मौत हुई है या नहीं। इसके बाद ही पैसा दिया जाएगा। उसने कहा कि इस तरह के कागजात तो लोग फर्जी भी बनवा लेते हैं इनका क्या भरोसा।
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया(बांसडीह) के शाखा प्रबंधक योगेश यादव ने बताया कि सोमवार को जीउत गोड़ को बैंक भेज दीजिएगा। उसके कागजात चेक कर यदि सही हुए तो पेमेंट करा दिया जाएगा।