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इधर प्रशासन रहा सख्त, तो लोगों ने भी बनाई पटाखों से दूरी, इस बार प्रदूषण हुआ कम

Tue, 17 Nov 2020 10:24 AM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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crackers - फोटो : PTI
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इस बार दिवाली पर प्रशासन की ओर से आतिशबाजी पर पूरी तरह से रोक लगाई गई थी। लोगों ने पटाखे नहीं जलाने का संकल्प भी लिया था। इसी का असर रहा कि इस बार खासकर शहरी इलाकों में पटाखे पहले की अपेक्षा कम जलाए गए। ऐसे में दीपावली पर प्रदूषण की मात्रा पिछली बार से कम बढ़ी।

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दिवाली के अगले दिन सुबह बनारस प्रदूषण के मामले में प्रदेश में छठे स्थान पर रहा। बाद में हल्की बूंदाबांदी के कारण शाम तक हवा के स्तर में काफी सुधार हुआ और शहर आरेंज से येलो जोन में पहुंच गया। शाम को वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 193 दर्ज किया गया।


सोमवार को क्लाइमेट एजेंडा की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार दीपावली की रात पीएम 2.5 और पीएम 10 का स्तर मानकों की तुलना में साढ़े चार गुना अधिक रहा। दीपावली की रात शहरी इलाके में प्रदूषण का स्तर पिछले साल के मुकाबले कम रहा। शहर के बाहर वाले इलाकों में प्रदूषण की मात्रा सबसे अधिक रही।

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वाराणसी में पड़ा पटाखों का कचरा। - फोटो : अमर उजाला
इसके कारण आशापुर, कचहरी, पांडेयपुर, काशी स्टेशन, सारनाथ, कैंट स्टेशन और नई सड़क की वायु गुणवत्ता ज्यादा खराब रही। पिछले साल जहां प्रदूषण का स्तर सामान्य से पांच गुना से अधिक रहा, वहीं इस बार यह साढ़े चार गुना था। आंकड़ों के अनुसार 2019 में महमूरगंज का एयर क्वालिटी इंडेक्स सबसे अधिक 529 तो चौक का सबसे कम 267 रहा था। इस बार आशापुर का एक्यूआई सबसे अधिक 423 तो रविंद्रपुरी का सबसे बेहतर 191 रहा।

सबसे अधिक प्रदूषित रहा आशापुर
दीपावली की रात आशापुर में पीएम 2.5 का स्तर 252 और पीएम 10 का स्तर 423, पांडेयपुर में पीएम 2.5 का स्तर 230 और पीएम 10 का स्तर 368, काशी स्टेशन का पीएम 2.5 का स्तर 177 और पीएम 10 का स्तर 350, सारनाथ का पीएम 10 का स्तर 342, कैंट स्टेशन पर पीएम 10 का स्तर 333 और नई सड़क पर 317 तक पहुंच गया था। क्लाइमेट एजेंडा की एकता शेखर ने शहर के 18 इलाकों में वायु गुणवत्ता की जांच की गई और दीपावली की अगली सुबह तीन बजे से 8 बजे तक यह आंकड़े एकत्र किए गए।
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बढ़ सकता है संक्रमण
बीएचयू के वैज्ञानिक प्रो. बीडी त्रिपाठी ने बताया कि राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा जारी अध्ययन के अनुसार हवा में बढ़ते हुए प्रदूषण से कोविड-19 संक्रमण के भी बढ़ने का खतरा है। एजेंसियों की जांच रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने अत्यधिक प्रदूषित हवा वाले शहरों में पटाखे पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया था।

2020 के आंकड़े
स्थान            पीएम 2.5        पीएम 10
आशापुर        252                423
पांडेयपुर        230                368
सारनाथ         198                342
कचहरी         189                338
कैंट स्टेशन    194                333
गोदौलिया      133                291
मैदागिन          146              283
लंका              167              280
चौक              143             251
बरेका              147            243
रविंद्रपुरी            115          191

बारिश से मिलेगी और राहत
सोमवार की सुबह हुई बूंदाबांदी ने वायु प्रदूषण के स्तर को कम कर दिया है। सोमवार की सुबह से पूर्वानुमान के मुताबिक आसमान में बादल छाए रहे। दोपहर में बनारस का वायु गुणवत्ता सूचकांक जहां 233 था। वहीं शाम को यह 193 तक पहुंच गया। इसके साथ ही बनारस फिर से येलो जोन में पहुंच गया।

मौसम विज्ञानियों के अनुसार अगले चौबीस घंटों तक पूर्वांचल में बादलों की सक्रियता के बीच बूंदाबांदी होने की उम्मीद है। वायु प्रदूषण गुणवत्ता सूचकांक 100 के आसपास बने रहने की उम्मीद है। इसके बाद बारिश से धूल भी बैठ जाएगी और वातावरण में वायु प्रदूषक धूल के कण उठ नहीं पाएंगे और लोगों को वायु प्रदूषण से पर्याप्त राहत मिलेगी।

शहर में हवा मापने के लिए लगेंगी दो और मशीनें, चल रहा सर्वे
बनारस की हवा को मापने के लिए प्रदूषण नियंत्रण विभाग की ओर से दो और एबिएंट एयर क्वालिटी मशीन लगाई जा रही है। इसके साथ ही शहर में मशीनों की संख्या तीन हो जाएगी। इससे बनारस के एक्यूआई को ज्यादा सटीक तरीके से मापन करना संभव होगा।

सीपीसीबी ने करीब तीन करोड़ रुपये से दो मशीनें लगाने को मंजूरी दी है। अभी तक अर्दली बाजार में ही मशीन लगी हुई है। संभावना है कि गोदौलिया और लंका क्षेत्र में इन मशीनों को लगाया जाएगा। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी कालिका सिंह ने बताया कि सीपीसीबी की ओर से शहर में दो मशीनों को मंजूरी मिली है। इसके स्थान को लेकर सर्वे किया जा रहा है।
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