फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

स्वर्णमयी हो रहा आदि विश्वेश्वर का गर्भगृह

विज्ञापन
विज्ञापन
द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक काशी विश्वनाथ का मंदिर अब नीचे से ऊपर तक स्वर्ण आभा से दमकता नजर आएगा। बाबा श्री काशी विश्वनाथ के शिखर के बाद अब गर्भगृह की दीवारें स्वर्ण मंडित होंगी। आदि विश्वेश्वर के दरबार को पूरी तरह से स्वर्णमंडित करने का काम चल रहा है। महाशिवरात्रि पर बाबा के दरबार में आने वाले श्रद्धालुओं को काशीपुराधिपति के भव्य, दिव्य और नव्य धाम के साथ ही दरबार की स्वर्णिम आभा के भी दर्शन होंगे।
विज्ञापन

मंदिर के गर्भगृह की दीवारों को स्वर्णमंडित करने का काम अंतिम चरण में है। महाशिवरात्रि से पहले स्वर्ण पत्तर को लगाने का काम पूरा कर लिया जाएगा। बाबा के भक्तों के सहयोग से मंदिर प्रशासन गर्भगृह को स्वर्णमंडित करा रहा है। गुजरात से आई विशेषज्ञों की पूरी टीम गर्भगृह को स्वर्णमंडित करने में लगी हुई है।
छह साल पहले योजना नहीं बढ़ सकी थी आगे
बाबा विश्वनाथ मंदिर के गर्भगृह को छह साल पहले ही स्वर्णमंडित कराने की योजना बनी थी। इस पर लगभग 42 करोड़ से ज्यादा खर्च का अनुमान लगाया गया था और मंजूरी भी मिल गई थी। जब शासन ने स्वर्ण शिखर और दीवारों पर अतिरिक्त भार सहने की क्षमता की रिपोर्ट मांगी तो बीएचयू आईआईटी ने अपनी रिपोर्ट में अतिरिक्त भार सहने योग्य नहीं माना था। वहीं, केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान रुड़की (सीबीआरआई) ने भार सहने की क्षमता के अनुरूप बताया था। यही कारण था कि यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी और शासन ने खारिज कर दिया था। दानदाताओं से स्वर्ण मंडित कराने का प्रस्ताव मिलने के बाद मंदिर प्रशासन ने सर्वे कराने के बाद काम शुरू करा दिया है।
विज्ञापन

महाराज रणजीत सिंह ने किया था सोना दान
मंदिर का निर्माण 1780 में इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने कराया था। शाह सुजाउद्दौला से युद्ध में जीते गए सोने के एक तिहाई भाग को पंजाब के महाराजा रणजीत सिंह ने बाबा के दरबार में अर्पित किया था।
बेंगलूरू की कंपनी ने दिया था प्रस्ताव
2016 में न्यास परिषद ने मंदिर परिसर के अविमुक्तेश्वर, तारकेश्वर और रानी भवानी के भुवनेश्वर मंदिर के शिखरों को स्वर्ण मंडित कराने का प्रस्ताव दिया था। तब बेंगलूरू की स्मार्ट क्रिएशन कंपनी ने 42 करोड़ रुपये में इस योजना को साकार करने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन स्वर्ण पत्तर चढ़ाने से पहले मंदिर के शिखर और दीवारों की भार सहने करने की क्षमता की रिपोर्ट मांगी गई थी।
विज्ञापन

-1780 में इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने कराया विश्वनाथ मंदिर के मौजूदा स्वरूप का निर्माण
-1853 में पंजाब के तत्कालीन महाराजा रणजीत सिंह ने साढ़े 22 मन सोने से शिखर को कराया था स्वर्ण मंडित
-1000 किलो सोना बाबा के शिखर में महाराजा रणजीत सिंह ने लगवाया था।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें