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UP: अपरिचित से दोस्ती ही मुसीबत में डालती है, सावधान और सतर्कता ही बचाव; एडीसीपी महिला अपराध ने किया जागरूक

Tue, 31 Mar 2026 02:32 PM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: एडीसीपी महिला अपराध ने डॉ. घनश्याम सिंह कॉलेज ऑफ एजुकेशन में छात्र-छात्राओं को जागरूक किया। उन्होंने बताया कि अपरिचित से दोस्ती ही मुसीबत में डालती है। ऐसे में सावधान और सतर्कता ही बचाव का तरीका है। 
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एडीसीपी महिला अपराध ने डॉ. घनश्याम सिंह कॉलेज ऑफ एजुकेशन में छात्र-छात्राओं को किया जागरूक - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जिस तरह सड़क पर सावधानियां बरती जाती हैं, ठीक उसी तरह सोशल मीडिया पर भी सावधानी बरतें। सोशल साइट्स पर निगरानी रखें और प्राइवेसी बनाए रखें। अपरिचित किसी को भी दोस्त न बनाएं। सतर्कता और जागरूकता ही आपको साइबर ठगी से बचा सकती है। यह बातें अपर पुलिस उपायुक्त महिला अपराध नम्रता श्रीवास्तव ने डॉ. घनश्याम सिंह कॉलेज ऑफ एजुकेशन, मोहांव गोसाईपुर, चोलापुर में सोमवार को पुलिस की पाठशाला में कहीं। इस दौरान उन्होंने छात्र-छात्राओं को साइबर बुलिंग और महिला हेल्पलाइन से जुड़ी शॉर्ट फिल्में भी प्रोजेक्टर के माध्यम से दिखाकर साइबर अपराध के प्रति जागरूक किया।

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उन्होंने छात्र-छात्राओं से कहा कि सोशल प्लेटफॉर्म पर सक्रिय रहना कोई बुरी बात नहीं है, मगर अनजान लाइक को अपना समर्थन बिल्कुल न दें। इससे कोई भी परेशानी हो सकती है और किसी मुसीबत में भी फंस सकते हैं। अंजान नंबर से आने वाले वीडियो कॉल भी नहीं उठाने चाहिए। फेसबुक पर अनजान लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार नहीं करनी चाहिए, जब तक उस व्यक्ति के बारे में पूरी जानकारी हासिल न कर लें। 

एडीसीपी महिला अपराध ने कहा कि साइबर ठगी होने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें। जितनी जल्दी शिकायत होगी, उतनी ही जल्दी पैसा रिकवर होने की संभावना बढ़ जाती है और बैंक खाते में पैसा होल्ड हो सकता है। व्हाट्सएप में टू-स्टेप वेरिफिकेशन अपनाकर अपना डेटा सुरक्षित रखा जा सकता है। ऑनलाइन अकाउंट को हमेशा लॉग आउट रखें। मुफ्त उपहार, प्रस्ताव, संदेश या मेल आदि पर विश्वास न करें।

उन्होंने छात्र-छात्राओं को वीमेन पावर लाइन 1090, 181 वीमेन हेल्पलाइन, आपातकालीन पुलिस सेवा डायल-112, 1930 साइबर अपराध, 1098 चाइल्ड लाइन और 1076 मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर के बारे में भी बताया। छात्राओं ने इन्हें अपने मोबाइल और नोटबुक में दर्ज किया। क्राइम होने पर चुप न बैठें, तुरंत परिजनों और शिक्षकों को बताएं और रिपोर्ट दर्ज कराएं। अपने क्षेत्र के थाना, सर्किल और जोन की जानकारी रखें। 

छात्राओं को बताया कि यदि आप अकेली हैं या किसी मुसीबत में फंस गई हैं, तो डायल-112 पर संपर्क करें। पीआरवी आपको सुरक्षित घर तक छोड़ने के साथ ही मुसीबत से बाहर निकालने में मदद करेगी। इसका गलत उपयोग न करें, बल्कि जरूरतमंद स्थिति में ही इसका लाभ लें। 

पुलिस की पाठशाला में अपर पुलिस उपायुक्त महिला अपराध का कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुनील कुमार मिश्रा ने स्मृति चिह्न और अंगवस्त्र देकर स्वागत किया। संचालन डॉ. प्रज्ञा मिश्रा ने किया और धन्यवाद ज्ञापन कॉलेज प्रशासक संजीव सिंह ने दिया। महाविद्यालय में रेवा शंकर सिंह, सुनील सिंह, प्रबल प्रताप, सौरभ चौरसिया, बिंदु सिंह, डॉ. गरिमा, कृष्णा यादव, वंदना उपाध्याय और निकिता सिन्हा सहित कई शिक्षक-शिक्षिकाएं मौजूद रहीं।
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क्या न करें

  • अपनी व्यक्तिगत तस्वीरें सार्वजनिक रूप से साझा न करें।
  • ब्राउजर में सोशल मीडिया अकाउंट में लॉग-इन करते वक्त “रिमेंबर मी” को चेक न करें।
  • अपनी जन्मतिथि, नाम, मोबाइल नंबर आदि का इस्तेमाल पासवर्ड में न करें।
  • किसी भी पॉपअप विज्ञापन पर ध्यान न दें।

इन सवालों के दिए जवाब
सवाल : सीबीआई में जाना है, क्या पढ़ाई करें? - जान्ह्वी जायसवाल, छात्रा
जवाब:
स्नातक के बाद एसएससी सीजीएल परीक्षा पास करनी होती है। कानून, फोरेंसिक साइंस में डिग्री तथा कंप्यूटर और अकाउंटिंग का ज्ञान अतिरिक्त लाभ दे सकता है।
सवाल : यदि कुछ गलत हो गया और सुनवाई नहीं हो रही है तो क्या करें? - कोमल, छात्रा
जवाब:
सबसे पहले अपने थाने में लिखित शिकायत देकर प्राथमिकी दर्ज कराएं। यदि थाने में सुनवाई नहीं हो रही है, तो सर्किल कार्यालय, एडीसीपी कार्यालय, डीसीपी, फिर डीआईजी रेंज स्तर के अधिकारी और अंत में पुलिस आयुक्त कार्यालय में शिकायत दर्ज कराएं। आरोपी पर कार्रवाई अवश्य होगी। सात साल से कम सजा वाले मामलों में तुरंत गिरफ्तारी नहीं होती है, लेकिन यदि आरोपी अभ्यस्त अपराधी है तो पुलिस उसे गिरफ्तार कर सकती है।
सवाल : यदि कोई नेता या अधिकारी का नाम किसी अपराध में आता है, तो क्या उसकी गिरफ्तारी होती है? - वैष्णवी, छात्रा
जवाब:
कानून सभी के लिए समान है। कोई कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, यदि उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज है और पर्याप्त साक्ष्य हैं, तो उसकी गिरफ्तारी होती है।
सवाल : साइबर क्राइम होने पर सबसे पहले क्या करें? - काजल यादव, छात्रा
जवाब:
इसकी सूचना नजदीकी थाने में तुरंत दें। थाने जाने से डरें नहीं, बेझिझक अपनी समस्या बताएं। हर थाने में महिला हेल्प डेस्क होती है और तहरीर लिखने में भी महिला पुलिसकर्मी मदद करती हैं।
सवाल: कॉलेज से निकलते समय रास्ते में कोई परेशान करता है, तो कहां और किससे शिकायत करें? - विशाखा शुक्ला, छात्रा
जवाब:
लड़कियों के साथ हुए किसी भी अपराध के लिए कई हेल्पलाइन नंबर उपलब्ध हैं, जहां आपकी पहचान गोपनीय रखी जाती है। आप वहां अपनी शिकायत दर्ज करा सकती हैं।

महिला सुरक्षा और बचाव से जुड़ी जानकारियां छात्राओं के काफी काम आएंगी। अमर उजाला और कमिश्नरेट पुलिस की यह पहल छात्र-छात्राओं की जागरूकता बढ़ाने में सहायक है। -नागेश्वर सिंह, प्रबंधक, डॉ. घनश्याम सिंह कॉलेज ऑफ एजुकेशन

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